सऊदी क्राउन प्रिंस की सुरक्षा बढ़ी, इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी से दबाव में रक्षा तंत्र

रियाद: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त हो गई है। हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों में आई तेज़ी के बाद क्राउन प्रिंस अब भारी सुरक्षा वाले, बंकर से लैस महलों के बीच बदल-बदलकर रह रहे हैं। उनकी सुरक्षा के लिए चुनिंदा और खास तौर पर प्रशिक्षित गार्ड्स की टीम तैनात की गई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी अधिकारियों ने माना है कि देश के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार लगातार घट रहा है। हालात ऐसे हैं कि कमांडरों को एयर डिफेंस बैटरियों को दोबारा तैनात करना पड़ा है, ताकि शाही महलों और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता मिल सके।
रियाद एयरपोर्ट पर हमला और उसके बाद का घटनाक्रम
इस बढ़ते खतरे की शुरुआत 10 अक्टूबर को रियाद के किंग ख़ालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले से मानी जा रही है। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। अगले दिन, 11 अक्टूबर को, एक और प्रोजेक्टाइल हमला हुआ। हालात इतने गंभीर हो गए कि 12 अक्टूबर 2026 को हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याहया सरी ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को चेतावनी दी कि वे सऊदी एयरपोर्ट पर उड़ान भरने से बचें। समूह ने मक्का और मदीना के एयरपोर्ट को इस चेतावनी से बाहर रखा, जबकि बाकी एयरपोर्ट को असुरक्षित लक्ष्य बताया।
उसी दिन सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने घोषणा की कि खमीस मुशैत को निशाना बनाकर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया गया है। वहीं सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने कहा कि हालिया हमलों ने देश के बुनियादी ढांचे की परीक्षा ली है, और सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "गंभीर" जवाब देगी।
रक्षा क्षमता में आई इस कमी को देखते हुए सऊदी अरब ने सहयोगी देशों से मदद मांगी है, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। साथ ही देश दुनिया के बाज़ार में अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम तलाश रहा है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल है। 11 अक्टूबर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान से बातचीत के दौरान सऊदी अरब और हूती आंदोलन के बीच संवाद कराने में मध्यस्थता की पेशकश की। फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि इन प्रयासों से तनाव कम होगा या नहीं, लेकिन रियाद की सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे पर बढ़