सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता 10 लाख बैरल रोज़ करेगा

रियाद: सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (पेट्रोलाइन) की क्षमता अगले दो से तीन साल में 10 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अभी इसकी अधिकतम क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने यह बात सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को रियाद में WPC एनर्जी कांग्रेस के दौरान कही।
इस योजना का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाना है। सरकार और सरकारी कंपनी सऊदी अरामको इसके लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर बातचीत कर रही हैं। प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ ने पुष्टि की कि इन बातचीत में कुवैत भी शामिल है। उन्होंने बताया कि परियोजना में विदेशी स्वामित्व और वित्तपोषण के विकल्प भी खोजे जा रहे हैं।
कुवैत से होने वाले तेल निर्यात को सीधे लाल सागर से जोड़ने की बात भी इसी परियोजना में है। खाड़ी के उन देशों के लिए यह वैकल्पिक रास्ता होगा, जिनकी अर्थव्यवस्था होर्मुज़ से जुड़े जोखिमों की वजह से प्रभावित हुई है।
यह पहल ऐसे समय आई है जब पाइपलाइन पर हाल में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं हुई हैं। सितंबर में ड्रोन हमलों के बाद इसका संचालन कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। 5 अक्टूबर 2026 को फिर से ऐसे हमले हुए और पाइपलाइन बंद करनी पड़ी। 6 अक्टूबर तक काम दोबारा शुरू हो गया, और उस समय लाइन से रोज़ 58 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।
क्षमता बढ़ाने के लिए सऊदी अरामको एक प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को कच्चे तेल के परिवहन के लिए बदल रही है। इससे 12 लाख बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है, और यह काम सात से आठ हफ्ते में पूरा होने का अनुमान है।
इसी बीच सऊदी न्यूज़ (@SaudiNews50) की 13 अक्टूबर 2026 की एक पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से ईरान को "फेल्ड स्टेट" कहा गया है। पोस्ट के मुताबिक, ईरान के बारे में फैसला "बहुत जल्द" लिया जाएगा।