हमलों के बीच भी तेल आपूर्ति नहीं रुकेगी: सऊदी ऊर्जा मंत्री का दो टूक ऐलान

रियाद, सऊदी अरब: सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने राजधानी रियाद में चल रही 25वीं विश्व पेट्रोलियम कांग्रेस (WPC Energy) के मंच से साफ कहा है कि राजधानी और उसके बुनियादी ढांचे पर हुए घातक हमलों के बावजूद देश अडिग है। 12 अक्टूबर 2026 को दिए गए इस संबोधन में उन्होंने दुनिया के सामने यह संदेश रखा कि सऊदी अरब अपनी ऊर्जा प्रतिबद्धताओं से पीछे नहीं हटेगा।
कांग्रेस 11 से 15 अक्टूबर तक चल रही है और इसकी थीम है 'सबके लिए ऊर्जा भविष्य के रास्ते'। इसी मंच से प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ ने किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई ठिकानों पर हुए हमलों का ज़िक्र किया। उन्होंने देश की क्षमता की तुलना उस फीनिक्स पक्षी से की जो राख में से फिर उठ खड़ा होता है। उनका कहना था कि चुनौतियां चाहे जैसी हों, सऊदी अरब उनसे उबरना जानता है।
पाइपलाइन विस्तार से सप्लाई को सहारा
मंत्री ने बताया कि सऊदी अरब ने दशकों तक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, वैकल्पिक निर्यात मार्गों और मज़बूत सप्लाई चेन में निवेश किया है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे। इसी रणनीति के तहत ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के विस्तार की योजना है। लक्ष्य अगले दो से तीन साल में तेल पाइपलाइन की क्षमता को प्रतिदिन 10 मिलियन बैरल तक ले जाने का है। उनके मुताबिक यह कदम उस बड़े विज़न का हिस्सा है, जिसमें भरोसेमंद तेल और गैस के साथ अक्षय ऊर्जा और कम उत्सर्जन वाली तकनीकों में भी निवेश किया जा रहा है।
क्षेत्रीय तनाव का असर हवाई यात्रा पर भी दिख रहा है। क़तर एयरवेज़ ने रियाद और दम्माम के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। इसके बावजूद सऊदी अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक बाज़ारों को ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति जारी रहेगी और क्षेत्रीय संघर्ष देश की आर्थिक ज़िम्मेदारियों को पटरी से नहीं उतारेंगे।
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 के लिए सऊदी अरब की जीडीपी में 3.3 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है, जिसकी वजह क्षेत्रीय संघर्ष और आपूर्ति में बाधाएं बताई गई हैं। ऐसे माहौल में विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और अन्य अधिकारी ओपेक+ सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए हुए हैं, ताकि बाज़ार स्थिर रहे और ऊर्जा ठिकानों पर आगे के हमले रोके जा सकें।