यमन के तैज़ शहर में हूती घेराबंदी तोड़ने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले बलों ने तेज किया हमला

तैज़ (यमन): सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने यमन के तैज़ शहर के आसपास कई लक्षित हमले किए हैं। इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य हूती लड़ाकों द्वारा लगाई गई उस पुरानी घेराबंदी को तोड़ना है, जिसने 8 लाख से ज्यादा निवासियों को अलग-थलग कर दिया है। घेराबंदी के कारण यहां के लोग ईंधन, साफ पानी, भोजन और दवाओं की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
18 अक्टूबर 2026 को क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेआ ने दावा किया कि सऊदी अरब ने तैज़, सना, इब्ब, लहज, सादा और अमरान सहित विभिन्न क्षेत्रों में 53 हवाई हमले किए, जिनमें आम नागरिक हताहत हुए हैं। दूसरी तरफ, सऊदी गठबंधन ने बताया कि उन्होंने खामिस मुशैत की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया।
'डॉन ऑफ यमन' अभियान के तहत यमन की सशस्त्र सेनाओं ने बताया कि उन्होंने 24 घंटे के भीतर हूती ठिकानों पर 1,417 हमले किए। इस कार्रवाई में लगभग 800 हूती लड़ाकों के मारे जाने या घायल होने की बात कही गई है। वहीं हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने नजरान के पास एक सऊदी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया, हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
तैज़ गवर्नर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से काफी हिंसा देखी गई है। सरकारी समर्थक सबा न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 17 अक्टूबर को हूती बलों ने मकबाना जिले के अल-मकदी गांव पर हमला किया। इस हमले में बच्चों समेत कम से कम आठ नागरिकों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए।
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने घेराबंदी खत्म करने के प्रयासों को जारी रखने का संकल्प जताया है। राष्ट्रपति के सलाहकार माईन अब्दुलमालिक सईद ने चेतावनी दी कि वर्तमान नाकाबंदी 2015 के संकट से भी अधिक गंभीर हो सकती है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ी है। मिस्र के प्रतिनिधि सभा ने 18 अक्टूबर को एक आपातकालीन सत्र बुलाया है, जिसमें सऊदी अरब को संभावित सैन्य सहायता देने पर चर्चा होगी। यह कदम राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी की क्षेत्रीय सुरक्षा की प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है। हूती समर्थित संसद ने मिस्र से सैन्य हस्तक्षेप न करने की अपील की है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संघर्ष को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की अपनी पेशकश दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने नागरिकों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन और मानवीय सहायता समूहों के लिए रास्ता खोलने की मांग की है।