सऊदी विदेश मंत्री ने ब्रिक्स सम्मलन में भरी हुंकार, कहा किसी को नहीं है संप्रभुता पर हमला करने की इजाजत.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट के दौरान दुनिया के सामने देश का पक्ष बहुत साफ शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, उसकी क्षेत्रीय अखंडता और वहां के संसाधन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन पर किसी भी तरह का खतरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी और साफ कर दिया कि किसी भी बहाने से यदि उनके इलाकों या जरूरी जगहों को निशाना बनाया गया, तो उसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित हुआ ब्रिक्स समिट
यह दो दिवसीय BRICS 2026 Summit भारत की राजधानी नई दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। इस समिट में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री Mohammed bin Salman की तरफ से उनके प्रतिनिधि के तौर पर विदेश मंत्री प्रिंस फैसल शामिल हुए। इस साल के सम्मेलन की थीम 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखी गई थी, जिसके तहत आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत की गई। प्रिंस फैसल रविवार को ही नई दिल्ली पहुंच गए थे।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीति पर जोर
प्रिंस फैसल ने अपने भाषण में इस बात पर चिंता जताई कि जिस तरह से अभी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, उससे टकराव का दायरा भी फैल रहा है। उन्होंने कहा कि इस हालात की वजह से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर खतरा लगातार मंडरा रहा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सबसे पहले तनाव को कम करने और कूटनीतिक रास्तों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर देश की संप्रभुता, उसकी आजादी और अंदरूनी मामलों में दखल न देने के उसूलों का सम्मान करना बहुत जरूरी है।
समुद्री रास्तों और तेल आपूर्ति की सुरक्षा
सऊदी विदेश मंत्री ने दुनिया भर में व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए समुद्री रास्तों के महत्व को भी सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz और दूसरे समुद्री रास्तों पर नेविगेशन की आजादी को बचाए रखना आज के समय में बेहद जरूरी है क्योंकि ये रास्ते दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई और व्यापार का मुख्य जरिया हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर इन जलमार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा। अरब खाड़ी की स्थिरता को उन्होंने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी बताया।