Saudi Arabia पर बड़ा खतरा, अमेरिका पहुंचे विदेश मंत्री, Houthis के हमलों के बाद हुआ नया रक्षा समझौता।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan सोमवार को अचानक वॉशिंगटन डीसी पहुंचे जहां उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio के साथ बेहद जरूरी बैठक की। Gulf क्षेत्र में अचानक से सैन्य तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है जिसके बाद यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब के गठबंधन ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और दो ड्रोन हवा में ही तबाह कर दिए जो सीधे रियाद और खमीस मुशायत को निशाना बना रहे थे। इस तरह के लगातार हमलों से आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और इसका असर वहां रहने वाले कामगारों और प्रवासियों पर भी साफ देखा जा रहा है।
एनर्जी प्लांट और एयरपोर्ट बने निशाना
iran समर्थित हूती विद्रोहियों की तरफ से लगातार सऊदी अरब के एनर्जी प्लांट और एयरपोर्ट्स पर हमले किए जा रहे हैं। इन ताजा हमलों की वजह से रियाद के स्कूलों को आनन-फानन में ऑनलाइन यानी रिमोट लर्निंग पर शिफ्ट करना पड़ा और पूरे देश में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया। इससे पहले किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास आसमान में काले धुएं के गुबार देखे गए थे। हूती गुट ने लाल सागर के कई अहम बंदरगाहों और द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है जिससे सऊदी शिपिंग रूट पर रुकावट आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे पुराने तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भी लगातार मुश्किलें बनी हुई हैं जिससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ गई है।
अमेरिका से मदद की मांग और नया रक्षा समझौता
सऊदी विदेश मंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान अमेरिका से और अधिक और मजबूत सैन्य मदद की मांग कर रहे हैं। हालांकि सऊदी के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने सीधे सैन्य हमलों की मांग की थी लेकिन अमेरिका ने फिलहाल अपनी मदद को केवल खुफिया जानकारी और टार्गेट सपोर्ट तक ही सीमित रखा है। अमेरिका की तरफ से पूरी सैन्य मदद न मिलने के बाद सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर एक नए रक्षा समझौते पर काम शुरू किया है। इस पूरे घटनाक्रम से यूएई और बहरीन जैसे पड़ोसी देशों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता का माहौल बन गया है और वैश्विक तेल बाजारों में भी हलचल तेज हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमलों की कड़ी निंदा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UN Security Council ने हूती विद्रोहियों के इन हमलों की औपचारिक रूप से कड़ी निंदा की है। इसके अलावा खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के महासचिव ने इन सभी हरकतों को देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी के देश पहले हुए ईरानी मिसाइल हमलों के असर से उबरने की कोशिश कर रहे थे। सऊदी अरब में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य देशों के प्रवासी इन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं क्योंकि सुरक्षा से जुड़े इन बदलावों का सीधा असर उनके रोजमर्रा के जीवन और काम पर पड़ता है।