सऊदी अरब: 50,000 रियाल से ज्यादा के गोल्ड ट्रांजेक्शन के लिए पहचान सत्यापन अनिवार्य

सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्रालय ने कीमती धातुओं और रत्नों के व्यापार में पारदर्शिता लाने और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में सोने और रत्नों का व्यापार करने वाले सभी व्यवसायों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे 50,000 सऊदी रियाल या उससे अधिक के किसी भी नकद लेन-देन के लिए ग्राहकों की पहचान का सत्यापन (Identity Verification) करें। यह नया नियम न केवल एक बड़ी खरीदारी पर, बल्कि कई छोटे लेकिन आपस में जुड़े लेन-देन पर भी लागू होगा।
मंत्रालय ने फेडरेशन ऑफ सऊदी चैंबर्स को भेजे एक ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत व्यापारियों को अब अपने ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित करनी होगी, उनकी जानकारी का सत्यापन करना होगा और इसका विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। ग्राहकों की सुविधा और जागरूकता के लिए, सभी दुकानों और शाखाओं में नोटिस बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, ताकि खरीदारों को पता रहे कि उन्हें कौन से दस्तावेज जमा करने हैं।
सत्यापन के लिए जरूरी दस्तावेज और शर्तें
नियमों के मुताबिक, पहचान के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा:
- सऊदी नागरिकों के लिए वैध राष्ट्रीय पहचान पत्र (National ID)।
- निवासियों के लिए रेजिडेंसी परमिट (Iqama)।
- गैर-निवासियों के लिए वैध पासपोर्ट।
- अन्य कानूनी रूप से स्वीकृत पहचान पत्र।
मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि केवल पहचान पत्र दिखाना काफी नहीं होगा; व्यापारियों को इन दस्तावेजों की असलियत की जांच करनी होगी और पूरी सावधानी (Due Diligence) बरतनी होगी। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि 50,000 रियाल की सीमा होने का मतलब यह नहीं है कि कीमती धातुओं और रत्नों के कानून के तहत अन्य जिम्मेदारियां खत्म हो गई हैं। इनवॉइस जारी करना और खरीदार-विक्रेता की जानकारी देना अब भी अनिवार्य रहेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवादी वित्तपोषण का संदेह होता है, तो व्यापारी को ट्रांजेक्शन की राशि चाहे कितनी भी कम क्यों न हो, पूरी जांच करनी होगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित नियामक अधिकारियों को देना व्यापारियों की कानूनी जिम्मेदारी होगी।