Saudi पर बड़ा हमला, रियाद और खमीस मुशैत को बनाया गया निशाना, अमेरिका ने ठुकराया ईरान का प्रस्ताव

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और देश के दक्षिणी शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से बड़ा हमला बोल दिया। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और आम नागरिकों की चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि आए दिन इस तरह के हमलों से सुरक्षा को लेकर खतरा मंडरा रहा है। सऊदी के रक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि सुरक्षा बलों ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए हवा में ही इन खतरनाक हमलों को नाकाम कर दिया और स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है।
सऊदी गठबंधन ने हवा में गिराए ड्रोन और मिसाइलें
सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि शनिवार को उनके डिफेंस सिस्टम ने रियाद की तरफ आ रहे दो हूती ड्रोन को आसमान में ही तबाह कर दिया। इसके अलावा खमीस मुशैत शहर को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक हवा में ही रोक लिया गया। इस घटना के बाद से ही सिविल डिफेंस विभाग ने आभा, जिजान और आसपास के इलाकों में रातभर के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया था। पिछले हफ्ते ही किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल डिपो पर भी ऐसा ही हमला हुआ था, जिसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं।
हूती संगठन के एक बड़े अधिकारी हेजाम अल-असद ने मीडिया से बातचीत में इस शनिवार के हमले को एक छोटे स्तर का पूर्वाभ्यास बताया और आने वाले समय में इसे और ज्यादा बड़े पैमाने पर करने की धमकी दी। दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए यह कन्फर्म किया कि उन्होंने ईरान की तरफ से आए सात दिन के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने और क्षेत्रीय तनाव को रोकने की बात कही गई थी। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कतर के माध्यम से यह पेशकश रखी थी कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी को हटा दे, तेल प्रतिबंधों को खत्म कर दे, जमे हुए पैसों को वापस कर दे और यमन तथा लेबनान में युद्धविराम लागू कर दे तो वे इस रास्ते को खोल देंगे और परमाणु बातचीत फिर से शुरू करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव को मानने से साफ इनकार कर दिया क्योंकि उनका मानना है कि ईरान पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता और वे नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद इस मामले में कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।
खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों में सुरक्षा की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासेम अलबुदैवि और अरब देशों के आंतरिक मंत्रियों ने नागरिक ठिकानों और ऊर्जा संयंत्रों पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि मक्का की सुरक्षा पर किसी भी तरह का खतरा देश के लिए एक बहुत बड़ी रेड लाइन है। इसके साथ ही सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह अल-फवाजैन ने सभी से मिलकर एक साथ खड़े होने और सैन्य एकता बनाए रखने की अपील की है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बड़े सैन्य अधिकारियों ने रियाद में एक अहम बैठक की है ताकि अपने पुराने रक्षा समझौते के तहत आगे की रणनीति पर मिलकर काम किया जा सके।
रियाद, जेद्दा, दुबई, दोहा और मनामा जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लाखों प्रवासी कामगारों के सामने सुरक्षा का एक नया संकट खड़ा हो गया है और लोगों को अक्सर एयर-रेड अलर्ट तथा उड़ानों में देरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद रखने और प्रतिबंधों के बीच हूती लड़ाके लगातार सऊदी अरब के तेल और ऊर्जा निर्यात के रास्तों को निशाना बना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर चल रही तमाम कूटनीतिक कोशिशें अभी तक किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं, जिसके कारण पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और हर कोई आने वाले दिनों को लेकर डरा हुआ है।