Yemen Conflict: सऊदी अरब पर हमले के बाद गठबंधन सेना का बड़ा पलटवार, यमन में एक साथ किए 40 एयरस्ट्राइक.

यमन में चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। 10 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने यमन के कई जिलों में एक साथ 40 एयरस्ट्राइक किए। यह सैन्य कार्रवाई हाल ही में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है, जिससे आम जनता की मुसीबतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
हूती विद्रोहियों के हमलों से शुरू हुआ था नया विवाद
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 8 सितंबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के चार प्रमुख शहरों अभा, खमीस मुशैत, जाजान और नज़रान को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इन हमलों की वजह से सऊदी अरब में 73 नागरिक घायल हो गए और वहां के ऑयल इंस्टॉलेशन में आग लग गई। इस घटना के बाद वहां का काम-काज और कामकाज की गतिविधियां अस्थाई तौर पर रोकनी पड़ीं, जिससे प्रशासन हरकत में आ गया।
गठबंधन सेना का कड़ा रुख और आधिकारिक बयान
यमन में लेजिटिमेसी का समर्थन करने वाले गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने साफ किया कि उनकी सेना देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय संपत्ति और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत की जा रही है ताकि देश को बचाया जा सके। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा की वजह से लगभग 20,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं और लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता और बढ़ता मानवीय संकट
इस खतरनाक होती स्थिति को लेकर दुनिया भर के बड़े संगठन अपनी गहरी चिंता जता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 7 सितंबर 2026 को चेतावनी दी थी कि अगर यह लड़ाई फिर से बड़े पैमाने पर शुरू हुई, तो इसके बहुत गंभीर परिणाम आम लोगों को भुगतने होंगे। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने हूती हमलों की कड़ी निंदा की है और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के महासचिव जासेम अल बुदैवी ने इन सभी हरकतों को सीधे तौर पर आतंकवादी गतिविधियां करार दिया है। फरवरी 2026 के बाद से अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से इस पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।