सऊदी अरब की गैर-तेल जीडीपी पहली बार 55 प्रतिशत के पार

रियाद: सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव दर्ज हुआ है। देश के उप वित्त मंत्री अब्दुलमोहसेन अल-खलाफ ने घोषणा की है कि सऊदी अरब की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अब गैर-तेल गतिविधियों का हिस्सा 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह पहला मौका है जब तेल से अलग क्षेत्रों ने इतना बड़ा योगदान दिया है।
अल-खलाफ ने यह जानकारी सोमवार को रियाद में चल रही वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस के मंच से दी। उनके मुताबिक यह बदलाव विजन 2030 की पहल के तहत आर्थिक विविधीकरण की कोशिशों का नतीजा है। तेल पर निर्भरता घटाकर नए क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की रणनीति अब आंकड़ों में भी दिखने लगी है।
सरकारी राजस्व की तस्वीर भी काफी बदली है। उप वित्त मंत्री के अनुसार गैर-तेल सरकारी राजस्व 2015 में लगभग 166 अरब रियाल (करीब 44.3 अरब डॉलर) था, जो अब बढ़कर लगभग 500 अरब रियाल (करीब 133.3 अरब डॉलर) हो गया है। इस बढ़त ने अर्थव्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया है और वैश्विक आर्थिक झटकों को झेलने की उसकी क्षमता बढ़ी है।
रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत आए हैं। अल-खलाफ ने बताया कि सऊदी नागरिकों में बेरोजगारी दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। उन्होंने इसका श्रेय राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रमों की सफलता और श्रम बाजार में सुधारों को दिया।
किन क्षेत्रों में आई तेजी
विकास की इस रफ्तार में कई नए क्षेत्र आगे दिख रहे हैं। उप वित्त मंत्री ने पर्यटन, मनोरंजन, खेल, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों के विस्तार पर खास जोर दिया। ये वे क्षेत्र हैं जिन्हें सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानकर तैयार कर रही है।
अल-खलाफ ने अपनी बात इस भरोसे के साथ समाप्त की कि विजन 2030 के सुधार देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत कर रहे हैं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की दिशा में गति बनी हुई है। तेल के भरोसे से हटकर बनी यह नई बुनियाद आने वाले वर्षों में सऊदी अर्थव्यवस्था की पहचान तय कर सकती है।