सऊदी का टूटा सपना, ईरान को नहीं कर पाएगा बाईपास, हौथी विद्रोहियों ने Oil Pipeline पर किया हमला

Lov Singh11 September 20264 min read35 viewsSaudi
सऊदी का टूटा सपना, ईरान को नहीं कर पाएगा बाईपास, हौथी विद्रोहियों ने Oil Pipeline पर किया हमला

रियाद/सना: यमन के हौथी विद्रोहियों के सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों के बीच देश की अहम ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, इस हमले की अभी तक सऊदी सरकार या किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। शुरुआती रिपोर्टों में पाइपलाइन के एक हिस्से के पास आग और धुएं की जानकारी दी गई है।

**यह पाइपलाइन इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? ** ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों और अबकैक के आसपास के प्रसंस्करण केंद्रों से कच्चा तेल पश्चिमी तट पर स्थित यनबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। वहां से तेल लाल सागर के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है।

इस पाइपलाइन का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि यह सऊदी अरब को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर तेल निर्यात करने का विकल्प देती है। मौजूदा क्षेत्रीय संकट में हॉर्मुज मार्ग से तेल परिवहन पहले ही गंभीर रूप से प्रभावित है, इसलिए यनबू मार्ग सऊदी निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

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**हमले की पुष्टि अभी बाकी ** सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हौथियों ने पाइपलाइन को कई स्थानों पर निशाना बनाया और सऊदी का यह प्रमुख वैकल्पिक तेल मार्ग ठप हो गया। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में अभी केवल आग, धुएं और संभावित नुकसान की बात कही गई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, उपग्रह तस्वीरों और आग की निगरानी करने वाले डेटा में मदीना के दक्षिण-पूर्वी इलाके में पाइपलाइन मार्ग के पास गर्मी और धुएं के संकेत दिखाई दिए। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसी तस्वीरों से आग का पता तो चल सकता है, लेकिन उसके कारण की पुष्टि अपने आप नहीं होती। आग तकनीकी खराबी, नियंत्रित फ्लेयरिंग या हमले—किसी भी वजह से हो सकती है।

तेल आपूर्ति पर बड़ा असर संभव

अगर पाइपलाइन को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसका संचालन रोकना पड़ा, तो सऊदी अरब के पास तेल निर्यात के विकल्प सीमित हो सकते हैं। सितंबर की शुरुआत में यनबू से कच्चे तेल और कंडेनसेट की लोडिंग लगभग 37 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने की खबर थी।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पाइपलाइन पर लंबे समय तक रुकावट से:

  • यनबू से तेल लदान घट सकता है।
  • सऊदी तेल को फिर से फारस की खाड़ी के बंदरगाहों की ओर मोड़ना पड़ सकता है।
  • लाल सागर के रास्ते चलने वाले टैंकरों पर सुरक्षा दबाव बढ़ सकता है।
  • वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और चढ़ सकती हैं।
  • एशिया और यूरोप को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हालिया रिपोर्टों में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की जानकारी भी सामने आई है, हालांकि इसमें हॉर्मुज क्षेत्र में टैंकर हमलों और व्यापक पश्चिम एशियाई तनाव का भी योगदान है।

**हौथी मोर्चा अब बाब-अल-मंदेब तक ** हौथियों ने यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जे का दावा किया है। इसके बाद उनके लड़ाके हानिश द्वीपों और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के बीच समुद्री व्यापार और ऊर्जा परिवहन का प्रमुख रास्ता है। यदि हौथी इस क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण या निगरानी हासिल करते हैं, तो सऊदी तेल निर्यात के साथ-साथ वैश्विक जहाजरानी पर भी सीधा खतरा पैदा हो सकता है।

सऊदी और हौथियों के बीच खुला टकराव

हौथियों ने हाल के दिनों में अबा, खमिस मुशैत और जिजान समेत सऊदी के दक्षिणी शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। एक बड़े हमले में 73 लोग घायल हुए और तेल तथा उपयोगिता प्रतिष्ठानों में आग लगने की खबर आई।

इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में हौथी ठिकानों पर हवाई हमले तेज किए हैं। दोनों पक्षों के बीच मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों का सिलसिला अब सीमा संघर्ष से आगे बढ़कर ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के संकट में बदलता दिख रहा है।

पाकिस्तान ने दूरी बनाई

सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान के सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अटकलें तेज थीं। लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मक्का रक्षा समझौते के तहत किसी सैन्य प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं हो रही है।

इससे संकेत मिलता है कि इस समय पाकिस्तान सीधे युद्ध में उतरने के बजाय कूटनीतिक समर्थन तक सीमित रहना चाहता है। यदि सऊदी तेल ढांचे पर हमले लगातार बढ़ते हैं, तो इस रुख पर फिर दबाव बन सकता है।

**सबसे जरूरी बात ** ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले का दावा अभी अपुष्ट है। पुष्टि होने पर यह सऊदी तेल निर्यात के खिलाफ हौथियों की सबसे गंभीर कार्रवाइयों में से एक होगी, क्योंकि यह वही वैकल्पिक मार्ग है जिसे सऊदी अरब हॉर्मुज जलडमरूमध्य की असुरक्षा के बीच इस्तेमाल कर रहा है।

फिलहाल स्थिति यह है कि हौथी हमले सऊदी शहरों से आगे बढ़कर तेल प्रतिष्ठानों, वैकल्पिक पाइपलाइन और लाल सागर के समुद्री मार्ग तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले घंटों में सऊदी की जवाबी कार्रवाई और तेल बाजार—दोनों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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