सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने संभाला मोर्चा, समुद्री तनाव के बीच तेल आपूर्ति बरकरार

क्षेत्रीय समुद्री रास्तों में बढ़ते तनाव और व्यवधानों के बीच सऊदी अरब ने अपनी ऊर्जा बुनियादी सुविधाओं की मजबूती का प्रमाण दिया है। सऊदी सेंट्रल बैंक के गवर्नर अयमान अल-सयारी ने स्पष्ट किया है कि देश द्वारा ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में किए गए दीर्घकालिक निवेश, विशेष रूप से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (पेट्रोलाइन), वैश्विक ग्राहकों तक तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में गेम-चेंजर साबित हुए हैं।
इस्तांबुल इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए गवर्नर अल-सयारी ने बताया कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में मौजूदा दिक्कतों के बावजूद, सऊदी अरब अपनी तेल आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दे रहा है। लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी यह विशाल पाइपलाइन पूर्वी सऊदी अरब के प्रमुख तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है, जिससे किंगडम को जोखिम भरे समुद्री रास्तों से बचकर तेल भेजने की सुविधा मिलती है।
पाइपलाइन की क्षमता और आर्थिक मजबूती
गवर्नर ने आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 58 लाख से 60 लाख बैरल तेल का परिवहन हो रहा है। इसके अलावा, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर विकसित एक सहायक परिवहन मार्ग के जरिए प्रतिदिन 10 लाख से 20 लाख बैरल की अतिरिक्त क्षमता भी उपलब्ध है।
हालांकि, अल-सयारी ने यह स्वीकार किया कि क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सऊदी अरब की कुल तेल आपूर्ति अभी भी संघर्ष-पूर्व स्तरों से नीचे है। उन्होंने जोर दिया कि सऊदी अरब की आर्थिक और वित्तीय मजबूती के पीछे उसके मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और 'विजन 2030' के तहत अर्थव्यवस्था के विविधीकरण के प्रयास हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबे समय तक खिंचते हैं, तो इससे वैश्विक मुद्रास्फीति (inflation) और सप्लाई चेन में अस्थिरता और बढ़ सकती है।