Saudi Arabia और Pakistan की बड़ी बैठक, मक्का सुरक्षा और रक्षा समझौते पर हुई चर्चा.

Sushma Kumari25 September 20262 min read0 viewsSaudi
Saudi Arabia और Pakistan की बड़ी बैठक, मक्का सुरक्षा और रक्षा समझौते पर हुई चर्चा.

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा मामलों को लेकर एक अहम बैठक राजधानी रियाद में संपन्न हुई। Saudi Defense Minister Prince Khalid bin Salman और Pakistan Army Chief Marshal Asim Munir ने 25 सितंबर 2026 को यह मुलाकात की जिसमें देश की सुरक्षा और हालिया सैन्य हमलों पर गंभीर चर्चा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य पवित्र शहर मक्का और देश के महत्वपूर्ण आर्थिक ठिकानों पर हुए हमलों से निपटना था। इस पूरी जानकारी के बारे में आधिकारिक तौर पर Saudi Press Agency (SPA) के माध्यम से पुष्टि की गई है।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता और सुरक्षा के इंतजाम

दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त प्रयासों की समीक्षा की जो मक्का संयुक्त रक्षा समझौते यानी Mecca Joint Defense Agreement (MJDA) के तहत चलाए जा रहे हैं। यह समझौता 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की द्वारा मिलकर लागू किया गया था। इस सामूहिक सुरक्षा समझौते के नियमों के अनुसार यदि किसी एक सदस्य देश पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है तो उसे सभी पर हमला माना जाता है। यह नया समझौता पहले से मौजूद सामरिक आपसी रक्षा समझौते Strategic Mutual Defence Agreement (SMDA) के आधार पर बनाया गया है जिसे 17 सितंबर 2025 को सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साइन किया गया था।

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क्षेत्रीय तनाव और मिसाइल हमलों का जवाब

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब क्षेत्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया था। हाल ही में ताइफ और यानबु की तरफ दागी गई 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया गया था। इसके अलावा 16 सितंबर को मक्का के पास एक ड्रोन को भी गिराया गया था। इन सभी घटनाओं के बाद MJDA देशों के विदेश मंत्री 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयार्क में मिले थे। वहां उन्होंने संस्थागत प्रगति की समीक्षा की और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा समर्थन किया।

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच चल रहे इस रक्षा सहयोग के तहत पाकिस्तान की तरफ से लगातार सैनिक, फाइटर एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब भेजे जा रहे हैं। इन सभी अभियानों और तैनातियों का पूरा खर्च सऊदी सरकार द्वारा उठाया जा रहा है ताकि देश की सीमाओं और पवित्र स्थलों को पूरी सुरक्षा मिल सके।

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