सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की का बड़ा कदम, मक्का रक्षा समझौते को लेकर होगी हाई-लेवल बैठक

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने 25 सितंबर 2026 को एक बड़ी घोषणा की है। तीनों देशों ने मिलकर अपने-अपने देशों के चीफ्स ऑफ जनरल स्टाफ की एक जरूरी बैठक बुलाई है। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत सऊदी अरब को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देने के ठोस तरीकों पर चर्चा करना है। इस संबंध में आधिकारिक जानकारी Saudi Press Agency (SPA) के माध्यम से साझा की गई है।
मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट की मुख्य बातें
यह समझौता 7 अगस्त 2026 को लागू हुआ था। इस समझौते के नियमों के अनुसार, यदि किसी भी एक सदस्य देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह नियम ठीक वैसा ही है जैसा नाटो का आर्टिकल 5 है। इससे पहले 17 सितंबर 2025 को सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता हुआ था, जिसे बाद में और विस्तार देते हुए तुर्की को भी इसमें एक प्रमुख सुरक्षा साझेदार के रूप में शामिल कर लिया गया। इस बारे में अधिक जानकारी SPA रिपोर्ट में दी गई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और हालिया घटनाक्रम
यह पूरा घटनाक्रम क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच सामने आया है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने लगातार हो रहे हुती हमलों के जवाब में सऊदी अरब को सैन्य सहायता मिलने की आवश्यकता पर चिंता जताई थी। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और पाकिस्तान का एक संयुक्त बयान सामने आया, जिसमें रियाद को अपने देश और लोगों की रक्षा करने के अधिकार का पूरा समर्थन किया गया। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को इस्तांबुल में स्ट्रेटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की पहली बैठक हुई थी, जिसमें तीनों देशों के अधिकारियों ने क्षेत्रीय आक्रामकता से निपटने के लिए रणनीतिक रक्षा पर समन्वय शुरू किया था।