सऊदी अरब में किवा प्लेटफॉर्म से जॉब ट्रांसफर और वीजा नियमों में हुए बड़े बदलाव

सऊदी अरब में भारतीय प्रवासियों के लिए किवा प्लेटफॉर्म पर जॉब ट्रांसफर और वीजा कोटा के नियमों में बदलाव किया गया है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Nura Basta5 November 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब में किवा प्लेटफॉर्म से जॉब ट्रांसफर और वीजा नियमों में हुए बड़े बदलाव

रियाद: सऊदी अरब में काम कर रहे भारतीय प्रवासियों के लिए जॉब ट्रांसफर और वर्क परमिट की प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। किवा (Qiwa) प्लेटफॉर्म के जरिए अब इन नियमों को अपडेट किया गया है, जिसका उद्देश्य लेबर मोबिलिटी को आसान बनाना और बिजनेस नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, वे प्रवासी कर्मचारी जिन्हें काम रोकने या कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की वजह से 'एब्सेंट' मार्क किया गया था, अब जॉब ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि कर्मचारी सऊदी अरब में कम से कम 12 महीने तक रह चुका हो।

ट्रांसफर की स्थिति में नए नियोक्ता (Employer) को कर्मचारी से जुड़े वर्क परमिट के सभी बकाया शुल्क का भुगतान करना होगा। यह प्रक्रिया तब शुरू होगी जब नया नियोक्ता किवा के माध्यम से जॉब ऑफर भेजेगा और कर्मचारी उसे औपचारिक रूप से स्वीकार करेगा।

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वीजा कोटा के मामले में अब बिजनेस की उम्र के आधार पर 'इंस्टेंट वर्क वीजा' तय किए जाएंगे। दो साल या उससे कम समय से चल रही कंपनियों के लिए प्रति साइकिल अधिकतम पांच इंस्टेंट वीजा की सीमा तय की गई है। वहीं, दो साल से अधिक पुरानी कंपनियां प्रति साइकिल 50 इंस्टेंट वीजा के लिए पात्र होंगी।

एस्टेब्लिशमेंट प्रोग्राम में शामिल फर्मों को शुरुआत में दो वीजा दिए जाएंगे, जिसे उनके सऊदीकरण (निटाकात) रेटिंग में सुधार के आधार पर बढ़ाया जा सकता है। अब सभी रोजगार अनुबंधों का किवा के जरिए डिजिटल प्रमाणीकरण अनिवार्य है और कागजी दस्तावेजों को मान्यता नहीं दी जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट तभी बनाए जा सकते हैं जब मसार (Masar) प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक क्लीयरेंस और रजिस्ट्रेशन क्लोजर पूरा हो जाए। किवा पोर्टल का उपयोग करने के लिए नफाथ (Nafath) सिस्टम के जरिए ऑथेंटिकेशन करना जरूरी होगा।

मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (MHRSD) ने स्पष्ट किया है कि किवा प्लेटफॉर्म लेबर विवादों की देखरेख नहीं करता है। ऐसे मामलों को मंत्रालय की सौहार्दपूर्ण निपटान सेवा या लेबर कोर्ट में ले जाना होगा।

प्लेटफॉर्म की सभी सेवाएं, जिसमें ट्रांसफर और परमिट जारी करना शामिल है, कंपनी की निटाकात रेटिंग और वेज प्रोटेक्शन सिस्टम (WPS) के पालन पर निर्भर करेंगी। नियोक्ता अब अपनी मर्जी से कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को नहीं बदल सकते; किसी भी बदलाव के लिए कर्मचारी की इलेक्ट्रॉनिक सहमति अनिवार्य है।

इसके अलावा, जिन कर्मचारियों का स्टेटस अबशेर या मुकीम पर 'फाइनल एग्जिट' या 'लेफ्ट एंड डिड नॉट रिटर्न' है, उनके रिकॉर्ड को कंपनी के लेजर से हटाया जा सकता है।

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