Saudi पर मिसाइल और ड्रोन हमला, हुती विद्रोहियों ने Sharurah मिलिट्री बेस को बनाया निशाना.

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और सुरक्षा के हालात दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होते जा रहे हैं। हाल ही में एक बड़ी घटना सामने आई है जिसमें हुती सैन्य प्रवक्ता Yahya Sari ने घोषणा की है कि उनके बलों ने सऊदी अरब के शरूराह स्थित एक मिलिट्री बेस पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आम लोगों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है। इस तरह की घटनाओं से वहां काम करने वाले प्रवासियों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
Sharurah मिलिट्री बेस पर हथियारों के गोदाम और कमांड सेंटर पर हमला
हुती प्रवक्ता के अनुसार, इस हमले में भारी मात्रा में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। निशाने पर मुख्य रूप से हथियारों का एक गोदाम और कई कमांड सेंटर थे। प्रवक्ता ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सऊदी कार्रवाई जारी रही तो आने वाले दिनों में और भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस हमले की पुष्टि के बाद से ही सैन्य और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।
सऊदी सिविल डिफेंस और ऊर्जा मंत्रालय का बड़ा कदम
दूसरी तरफ, सऊदी सिविल डिफेंस ने पुष्टि की है कि शरूराह, ताइफ और खमीस मुशाइत के लिए 11 सितंबर की रात को जो सुरक्षा चेतावनी जारी की गई थी, वह 12 सितंबर की सुबह तड़के समाप्त हो गई और संभावित खतरे के स्टेटस को हटा लिया गया है। हालांकि, यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव काफी ज्यादा है। इससे पहले गुरुवार सुबह सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर भी हमले हुए थे, जिससे रियाद और मदीना क्षेत्रों में भौतिक नुकसान हुआ था और कुछ लोग घायल भी हुए थे। इन घटनाओं को देखते हुए सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर 11 सितंबर को इस पाइपलाइन को पूरी तरह से बंद कर दिया था।
इराक और ईरान से जुड़ी गतिविधियां और क्षेत्रीय कूटनीति
सऊदी विदेश मंत्रालय ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के लिए इराक से लॉन्च किए गए ड्रोनों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि वह बगदाद सरकार के उन प्रयासों का समर्थन करने के लिए फिलहाल किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से बच रहा है जिसके जरिए इराक अपनी जमीन से इस तरह के हमलों को रोकने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए इraqi प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने आधिकारिक जांच के आदेश दिए हैं और मिसान प्रांत के सैन्य कमांडर को बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि सुरक्षा बलों को इराक-ईरान सीमा के पास अल-तिब क्षेत्र में ड्रोन लॉन्चर मिले थे। इसके बाद से इराक ने ईरान के साथ अपनी तीन सीमा चौकियों को भी बंद कर दिया है।
इसके अलावा, हुती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया है, जिससे बाब एल-मंडेब जलडमरूमध्य पर उनका प्रभाव और अधिक मजबूत हो गया है। उधर, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बलों ने मोचा शहर में हुती लड़ाकों के साथ संघर्ष की सूचना दी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, ईरान—जिसे हुती ताकतों का मुख्य समर्थक माना जाता है—ने ओमान में खाड़ी देशों के साथ बैठक करने की घोषणा की है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा की जा सके।