हूती ठिकानों पर सऊदी हमले, होर्मुज में LPG टैंकर पर ईरानी वार

खाड़ी में एक ही दिन दो मोर्चे एक साथ भड़क उठे। यमन में सऊदी अगुवाई वाले गठबंधन ने हूती नियंत्रण वाले इलाकों में 136 सैन्य ठिकाने तबाह करने का दावा किया है। दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने एक LPG टैंकर पर हमले की बात कही है। हूती ठिकानों पर सऊदी हमले की यह कार्रवाई बीते कुछ समय के सबसे बड़े अभियानों में गिनी जा रही है।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने इस अभियान की पुष्टि की। इसका नाम 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' रखा गया है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई हाल के उन हमलों के जवाब में की गई, जिनमें तीन सऊदी नागरिकों की जान गई। किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक सऊदिया विमान शामिल है। हूती-समर्थक चैनल अल-मसीराह ने सादा प्रांत में हमलों की खबर दी है।
होर्मुज में आग, समुद्री आवाजाही ठप-सी
IRGC नौसेना का दावा है कि उसने वियतनाम के झंडे वाले LPG टैंकर 'NV Sunshine' को निशाना बनाया। जहाज की मालिक कंपनी NatWit यानी Nhat Viet बताई गई है। ईरान का आरोप है कि टैंकर होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में बिना अनुमति वाले रास्ते से गुजर रहा था। उसके मुताबिक जहाज के इंजन रूम में भारी आग लग गई।
इसी बीच UKMTO ने बताया कि यूएई के अल जज़ीरा से करीब 13 नॉटिकल मील पश्चिम में एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल किसी जहाज से टकराया और आग लग गई। समुद्री सूत्रों ने इस जहाज की पहचान पनामा के झंडे वाले 'GEM NO.2' के रूप में की है।
आंकड़े हालात की गंभीरता खुद बताते हैं। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही 75 फीसदी गिर चुकी है। पिछले सात दिनों में UKMTO ने 275 जहाज-गतिविधियां दर्ज कीं और 11 हमले गिने, जिनमें से 10 जलडमरूमध्य के भीतर हुए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक 133 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदलवाया गया है।
बाजार पर बढ़ते दबाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डीजल को लेकर एक सहमति का एलान किया। इसके तहत तुरंत 3 लाख टन डीजल जारी होगा, जबकि नवंबर में 5 लाख टन और दिया जाएगा। यह अमेरिकी ट्रेजरी के एक अस्थायी लाइसेंस के जरिए होगा।
फरवरी 2026 से चल रहे इस टकराव में यूएई, कतर और दूसरे खाड़ी देशों ने हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताकर निंदा की है। 10 अक्टूबर 2026 तक पूरे क्षेत्र में एयर डिफेंस हाई अलर्ट पर हैं। ओमान मध्यस्थता की कोशिशों की मेजबानी जारी रखे हुए है, लेकिन जमीन पर नरमी के संकेत फिलहाल नहीं दिखते।
असर सिर्फ सैन्य नहीं है। खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं में ईंधन महंगा हो रहा है, खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ रहे हैं और यात्रा में रुकावटें बढ़ी हैं। इसकी मार स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ वहां रहने वाले बड़ी संख्या में प्रवासियों, खासकर भारतीय कामगारों के घरेलू बजट पर भी पड़ रही है।