यमन सरकार को सऊदी अरब का पूरा समर्थन, हूती मिलिशिया के खिलाफ कड़ा रुख

सऊदी अरब ने एक बार फिर यमन की वैध सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताई है। क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman की अध्यक्षता में हुई सऊदी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में क्षेत्रीय स्थितियों की समीक्षा की गई, जहां यह स्पष्ट किया गया कि सऊदी अरब यमन में लोकतंत्र और राज्य की संस्थाओं को बहाल करने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
काउंसिल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हूती आतंकवादी मिलिशिया ने शांति के रास्तों को छोड़कर सैन्य तनाव को प्राथमिकता दी है। सऊदी अरब का लक्ष्य यमन में हुए तख्तापलट को खत्म करना और वहां की वैध राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (Presidential Leadership Council) को मजबूती प्रदान करना है।
सैन्य कार्रवाई और रणनीतिक कदम
इस समर्थन के तहत सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है। इस ऑपरेशन के जरिए रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कोशिश की गई है। जानकारी के अनुसार, इस अभियान में 100 युद्धक विमानों ने हिस्सा लिया और लगभग 324 उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों पर सटीक हमले किए गए।
इसके अलावा, मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए किंग Salman bin Abdulaziz Al Saud के निर्देशों और डॉ. अल-अलीमी के अनुरोध पर सऊदी सरकार ने राज्य में रह रहे undocumented यमनियों की स्थिति को नियमित करने का फैसला किया है।
सऊदी अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि लाल सागर के शिपिंग मार्गों और अपने नागरिक व आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों का जवाब देने और अपनी सीमाओं की रक्षा करने का उन्हें पूरा अधिकार है। साथ ही, सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को लागू कर इस संकट को सुलझाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।