सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलाई ताकत, मक्का पर हमले के बाद हुआ नया रक्षा समझौता

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को एक बड़ी बैठक हुई जिसमें सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को आधिकारिक रूप से सक्रिय कर दिया गया, जिसे पहले 7 अगस्त को साइन किया गया था। इस समझौते के तहत अब यह नियम बनाया गया है कि अगर इनमें से किसी भी एक देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों मिलकर उसका जवाब देंगे। हाल ही में मक्का, सऊदी के तेल ठन्नों और आम नागरिकों की जगहों पर हाउती विद्रोहियों की तरफ से लगातार मिसाइल हमले किए जा रहे थे, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।
सऊदी एयर डिफेंस ने रोकी मिसाइलें
सऊदी सेना के अधिकारियों की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने ताइफ और यान्बु की तरफ दागी गईं कुल 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया और उन्हें नष्ट कर दिया। हालांकि दूसरी तरफ हाउती विद्रोहियों का यह दावा सामने आया था कि उन्होंने रियाद में मौजूद संवेदनशील जगहों और लाल सागर के पास स्थित अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाया है। इससे पहले भी रियाद में कई बार सायरन बज चुके हैं और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल डिपो के नजदीक धुआं उठता हुआ देखा गया था। वहीं दूसरी ओर, रास तनुरा में सऊदी तेल की लोडिंग का काम कई महीनों की रोक के बाद फिर से शुरू कर दिया गया है, हालांकि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यान्बु के कुछ हिस्सों को इस दौरान नुकसान पहुंचा है।
ईरान का सात दिन का रोडमैप और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
इस पूरे क्षेत्रीय विवाद पर बात करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने फॉक्स न्यूज को बताया कि हाउती विद्रोही पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और उनका नियंत्रण ईरान के पास नहीं है। इसके साथ ही, न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र के सामने बोलते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक नया सात दिन का रोडमैप पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाई जाती है, कम से कम 12 अरब डॉलर की संपत्ति को अनफ्रीज किया जाता है, तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए जाते हैं और यमन तथा लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम किया जाता है, तो इसके बदले में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा और परमाणु वार्ताओं को दोबारा शुरू किया जाएगा। हालांकि अभी तक वाशिंगटन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और कतर इस मामले में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।
सुन्नी मिलिट्री अंब्रेला और खाड़ी देशों का रुख
रक्षा मामलों के जानकारों का ऐसा मानना है कि इस त्रिपक्षीय समझौते के एक्टिव होने से तुरंत ही तुर्की या पाकिस्तान के जमीनी सैनिकों को यमन में उतारने की कोई योजना नहीं है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य खुफिया जानकारी आपस में साझा करना, सैन्य तालमेल को बेहतर बनाना और अपनी सुरक्षा प्रणालियों को एक साथ जोड़कर एक मजबूत सुन्नी मिलिट्री अंब्रेला तैयार करना है। दूसरी तरफ खाड़ी देशों यानी जीसीसी का इस मुद्दे पर रुख अभी भी अलग-अलग दिखाई दे रहा है। बहरीन ने ईरान के साथ सामूहिक बातचीत करने से साफ मना कर दिया है, ओमान अपनी तरफ से मध्यस्थता की कोशिशें लगातार जारी रखे हुए है, संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई तेहरान के साथ सीमित बातचीत बनाए हुए है, और कतर सभी पक्षों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है। रियाद में हुई यह बैठक इस बात का साफ संकेत देती है कि खाड़ी देशों की ऊर्जा बुनियादी ढांचे और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ अब सामूहिक सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।