सऊदी-यमन संघर्ष: पवित्र स्थलों पर हमलों को लेकर विश्लेषक का बड़ा दावा

सऊदी अरब और यमन के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नया मोड़ आया है। यमन के एक राजनीतिक विश्लेषक अनस अल-कादी ने हाल ही में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि हुती विद्रोहियों का मक्का या मदीना जैसे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं है। उनके अनुसार, सऊदी अरब के खिलाफ चल रहे इन सैन्य अभियानों का एकमात्र उद्देश्य आर्थिक दबाव बनाना और राजनीतिक समझौते के लिए मजबूर करना है।
बढ़ता तनाव और सीमा पार हमले
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमलों और तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। सऊदी अरब ने पिछले कुछ वर्षों में हुती बलों द्वारा पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के कई प्रयासों का आरोप लगाया है, जिसमें सितंबर 2026 की कुछ प्रमुख घटनाएं भी शामिल हैं।
- मदीना हमला: सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि एक ड्रोन ने मदीना में तैबाह बिजली वितरण स्टेशन को प्रभावित किया, जो पैगंबर की मस्जिद को बिजली प्रदान करता है। गठबंधन ने इसे पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाने का प्रयास बताया।
- मक्का के पास अवरोध: सऊदी वायु रक्षा ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जिसकी कड़ी निंदा की गई।
हुती विद्रोहियों का खंडन और जवाबी कार्रवाई
दूसरी ओर, हुती आंदोलन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विद्रोहियों ने मदीना हमले के दावों को झूठ करार देते हुए कहा है कि यह गठबंधन की असफलताओं को छिपाने का प्रयास है। हुती सैन्य सूत्रों का कहना है कि उनके निशाने पर केवल सैन्य ठिकाने रहे हैं, न कि धार्मिक स्थल।
तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों तरफ से सैन्य गतिविधियां जारी हैं। हाल ही में खमीस मुशाइत की ओर दागे गए मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने की खबरें भी सामने आई हैं, साथ ही नजरान के एक स्कूल पर प्रोजेक्टाइल गिरने से नुकसान की सूचना है।
लाल सागर में समुद्री मार्ग की सुरक्षा
जुलाई में हुती द्वारा समुद्री नाकाबंदी की घोषणा और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों को खतरे की चेतावनी के बाद से स्थिति अधिक गंभीर हो गई है। इन घटनाओं के जवाब में, सऊदी अरब लाल सागर शिपिंग कॉरिडोर को सुरक्षित करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर रणनीतिक कदम उठाने की योजना बना रहा है।