बिश्केक में जुटे मोदी, शी और पुतिन, शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से वैश्विक कूटनीति पर टिकी दुनिया की नजर

Nura Basta31 August 20262 min read6 viewsIndia
बिश्केक में जुटे मोदी, शी और पुतिन, शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से वैश्विक कूटनीति पर टिकी दुनिया की नजर

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के शिखर सम्मेलन से ठीक पहले सोमवार को दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा। इस अहम बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के शीर्ष नेता एक साथ पहुंचे हैं। पश्चिमी देशों के साथ संगठन के कई सदस्य देशों के रिश्तों में इन दिनों काफी तनाव चल रहा है, ऐसे में इस बैठक को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी और दुनिया भर के देशों की निगाहें इस बात पर हैं कि इस मुलाकात से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं।

द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर शुरू

सम्मेलन शुरू होने से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। रूसी सरकारी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में चीन के साथ वीजा-मुक्त व्यवस्था को स्थायी बनाने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई बैठक में रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच के पुराने और मजबूत होते संबंधों की सराहना की और आपसी रिश्तों को लगातार आगे बढ़ने वाला बताया।

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मंगलवार से शुरू होगी औपचारिक बैठक

शंघाई सहयोग संगठन की मुख्य और औपचारिक बैठक मंगलवार से शुरू होनी है। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी एक खास मुलाकात प्रस्तावित है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए रूस और ईरान दोनों ही इस संगठन को पश्चिमी देशों के अलावा अन्य देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत करने का एक बहुत बड़ा मंच मान रहे हैं। यह मंच क्षेत्रीय स्तर पर आपसी सहयोग बढ़ाने का काम करता है।

बदलते वैश्विक समीकरण और संगठन का महत्व

SCO को मूल रूप से क्षेत्रीय सहयोग और आपसी सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ बदलते वैश्विक समीकरणों ने इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। चीन हमेशा से इस मंच के जरिए क्षेत्रीय सहयोग का एक नया मॉडल आगे बढ़ाने की बात करता आया है, जबकि रूस दुनिया में एक बहुध्रुवीय व्यवस्था यानी कई देशों के पास शक्ति के संतुलन की वकालत करता रहा है। इस पूरी बैठक की विस्तृत जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में देख सकते हैं।

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