किर्गिस्तान में हुई SCO की बैठक, अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले के बीच नेताओं ने की शांति की बात.

दुनियाभर के बड़े नेता किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की 26वीं काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की बैठक में शामिल हुए। इस अहम सम्मेलन में संगठन के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया और इसकी मेजबानी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सдыр जापारोव ने की। इस बैठक का मुख्य विषय '25 इयर्स ऑफ द एससीओ: टूगेदर फॉर सस्टेनेबल पीस, डेवलपमेंट एंड प्रॉस्पेरिटी' रखा गया था। यह समिट ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और इसराइल के बीच ईरान पर लगातार हमले चल रहे हैं और दोनों तरफ से सैनिक कार्रवाई हो रही है।
इस बैठक में चीन, भारत, ईरान, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस के नेताओं के अलावा अजरबैजान, आर्मीनिया, मंगोलिया, तुर्की, लाओस, टोगो, वियतनाम और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक के आखिर में बिश्केक घोषणापत्र पास किया गया जिसमें ईरान की जमीन पर हुए फौजी हमलों की कड़ी निंदा की गई। साथ ही ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया गया और ईरान के सर्वोच्च नेता अतुल अली खामेनेई की मौत पर दुख जताया गया। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट Chinese Government News पर दी गई है।
विभिन्न नेताओं के सुझाव और आपसी बातचीत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विकास, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय बराबरी और काम करने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए चार सूत्री प्रस्ताव रखा। वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया और आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होने की बात कही। इसकी पूरी जानकारी PM India News पर देखी जा सकती है। दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अगर अमेरिका भी वैसा ही रवैया अपनाए तो तेहरान अमेरिका के साथ किसी अंतरिम समझौते को फिर से मानने के लिए तैयार है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि जून महीने में हुए समझौते को लागू करना ही इस समस्या का एकमात्र हल है।
तनाव और तेल की कीमतों पर असर
इस सम्मेलन के दौरान संगठन के नियमों में बदलाव किए गए और नई सुरक्षा व्यवस्था को मंजूरी दी गई, हालांकि प्रस्तावित SCO विकास बैंक को अभी शुरू नहीं किया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर हमला किया जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका के इस्तेमाल वाले दो एयरबेस पर हमले किए। इसके अलावा अमेरिका ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के दर्जनों ठिकानों पर और पहली बार ईरान की सरकारी तेल कंपनी के टैंकरों पर भी हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों को रोकने के लिए की गई थी। इन सब के बीच चीन ने ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों को मानने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और सभी देश आगे की स्थिति को लेकर चिंता में हैं।