नेपाल में तेजी से फैल रहा स्क्रब टाइफस, इस साल अब तक 9,872 संक्रमित, 22 की मौत

पड़ोसी देश नेपाल में एक खतरनाक बीमारी ने पैर पसारना शुरू कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। नेपाल के इनर मधेश से शुरू हुआ स्क्रब टाइफस अब देश के लगभग हर कोने में अपनी चपेट में ले रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक 9,872 लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 22 लोगों की जान जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारी अभी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि इन सभी मौतों की मुख्य वजह स्क्रब टाइफस ही थी या कोई अन्य कारण.
किन जिलों में फैला संक्रमण?
महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण महाशाखा के अनुसार, देश के 74 जिलों में इस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। राहत की बात यह है कि फिलहाल डोल्पा, मनांग और मुगु इन तीन जिलों में इसका असर देखने को नहीं मिला है। जानकारों का कहना है कि खेती-किसानी के मौसम में घास-फुस और झाड़ियों में पलने वाली किलनी (माइट) और उनके लार्वा काफी सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इसके फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, स्क्रब टाइफस कोई नई बीमारी नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह जापान में फैला था और नेपाल में सबसे पहले साल 1981 में इसका मामला सामने आया था। साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद से नेपाल में इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से तराई और इनर मधेश के इलाकों जैसे चितवन और नवलपरासी तक ही सीमित थी, लेकिन अब यह पहाड़ी और ठंडे इलाकों में भी पैर पसार चुकी है.
समय पर इलाज है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, और सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज पूरी तरह से मुफ्त और आसानी से उपलब्ध है। यदि मरीज समय रहते अस्पताल पहुंच जाए, तो वह पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है और इससे होने वाली मृत्यु दर भी काफी कम है। हालांकि, कई मामलों में लोग देरी से अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। सल्यान जैसे जिलों में अचानक मामलों और मौतों के बढ़ने के कारणों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गहन अध्ययन कर रही है.