सर्बिया में राजनीतिक संकट गहराया, प्रधानमंत्री ने संसद भंग करने का प्रस्ताव दिया और अक्टूबर में चुनाव का रास्ता साफ किया

Sushma Kumari7 September 20262 min read44 viewsWorld
सर्बिया में राजनीतिक संकट गहराया, प्रधानमंत्री ने संसद भंग करने का प्रस्ताव दिया और अक्टूबर में चुनाव का रास्ता साफ किया

सर्बिया की राजनीति में इस समय बड़ा उथल-पुथल चल रहा है और देश में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने की पूरी संभावना बन गई है। सर्बिया के प्रधानमंत्री ज्यूरो मैकुट ने सोमवार को देश की संसद को भंग करने की औपचारिक सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेज दी है। इस बड़े फैसले के बाद अब अक्टूबर महीने में देश में मध्यावधि संसदीय चुनाव कराए जाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। प्रधानमंत्री द्वारा यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले करीब दो वर्षों से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता और जनता के बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। सरकार की एक विशेष बैठक के बाद टेलीविजन पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने साफ किया कि ये चुनाव देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ राजनीतिक तनाव को कम करने में भी काफी मददगार साबित होंगे।

राजनीतिक संकट की शुरुआत और छात्र आंदोलन

सर्बिया में इस मौजूदा राजनीतिक संकट की शुरुआत मुख्य रूप से नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छतरी गिरने की एक बेहद दर्दनाक घटना के बाद हुई थी। उस भयानक हादसे में कुल 16 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद से आम जनता और खासकर युवाओं में भारी गुस्सा देखा गया। इस घटना के बाद देश भर में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग इस पूरे मामले में सख्त जवाबदेही तय करने और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की थी। अब स्थिति यह बन गई है कि इस छात्र आंदोलन ने आगामी संसदीय चुनाव में सीधे मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है, जिससे मौजूदा सत्तारूढ़ सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी एसएनएस के सामने एक बेहद मजबूत और कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सत्तारूढ़ पार्टी इस बार चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए ‘यूनाइटेड सर्बिया’ नाम से चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और यूरोपीय संघ की नजर

सर्बिया में चल रहे इन राजनीतिक घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी पैनी नजर बनी हुई है, जिसमें यूरोपीय संघ यानी ईयू भी शामिल है। सर्बिया की यूरोपीय संघ में शामिल होने की सदस्यता प्रक्रिया पहले से ही कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता और अन्य लोकतांत्रिक मानकों को लेकर बनी चिंताओं के कारण काफी धीमी चल रही है। इसके अलावा, रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से सर्बिया द्वारा दूरी बनाए रखना भी राजधानी बेलग्रेड और ब्रसेल्स के बीच आपसी तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच इस संसद भंग करने के प्रस्ताव पर अगले 72 घंटों के भीतर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं और आने वाले चुनाव सर्बिया की राजनीति में क्या नया बदलाव लाते हैं।

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