शारजाह कोर्ट ने विला रेंटल फ्रॉड मामले में भारतीय प्रवासी को किया बरी
शारजाह की अदालत ने 1.04 लाख दिरहम के विला रेंटल फ्रॉड केस में भारतीय प्रवासी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते फैसला सुनाया।

शारजाह: दुबई की एक कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत एक भारतीय प्रवासी को शारजाह की अदालत ने विला रेंटल फ्रॉड के मामले में बरी कर दिया है। इससे पहले इस व्यक्ति को अनुपस्थिति में एक साल की जेल और उसके बाद देश से निर्वासन (डिपोर्टेशन) की सजा सुनाई गई थी।
शारजाह कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस ने 5 नवंबर, 2026 को पहले दिए गए फैसले को पलट दिया। अदालत ने पाया कि आरोपी को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे। यह पूरा मामला 1,04,000 दिरहम की धोखाधड़ी वाली रेंटल स्कीम से जुड़ा था।
जानकारी के मुताबिक, भारतीय राष्ट्रीय शारजाह में एक विला का संयुक्त मालिक था। उसने केवल विज्ञापन के उद्देश्य से अपने मालिकाना हक के दस्तावेज एक रियल एस्टेट ब्रोकरेज फर्म को दिए थे। लेकिन उस फर्म ने इन दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया और एक संभावित किराएदार को झांसे में ले लिया।
ब्रोकरेज फर्म ने किराएदार को विश्वास दिलाया कि वह किराया कंपनी के खाते में ट्रांसफर करे। इस धोखाधड़ी को और पुख्ता करने के लिए जालसाजों ने मालिक के ईमेल जैसा ही एक फर्जी ईमेल एड्रेस भी बनाया, ताकि ट्रांजैक्शन को सही ठहराया जा सके।
प्रतिवादी की ओर से आयशा अल धाहेरी एडवोकेट्स एंड लीगल कंसल्टेंट्स के वकील शम्सुद्दीन करुनागप्पल्ली ने दलील दी कि किसी संपत्ति का मालिक होना या विज्ञापन के लिए पंजीकरण दस्तावेज देना आपराधिक दायित्व नहीं बनाता है।
अदालत ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने इस धोखाधड़ी वाले सौदे में कोई बातचीत की थी या इससे कोई लाभ कमाया था। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक दायित्व के लिए भागीदारी का विशिष्ट प्रमाण आवश्यक है, जो इस मामले में गायब था।