शारजाह के पास टैंकर पर ड्रोन हमला, आग बुझी; 22 भारतीय क्रू सुरक्षित

यूएई के तट के पास खड़े एक विशाल कच्चे तेल के टैंकर पर ड्रोन से हमला हुआ है। शारजाह एंकरेज में पनामा-ध्वज वाले सुपरटैंकर MT GEM NO. 2 से एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल टकराया, जिसे ड्रोन बताया गया है। जहाज पर आग लग गई, लेकिन उसे बुझा लिया गया। राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी 22 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं।
केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसकी पुष्टि की। उनके मुताबिक अधिकारी जहाज की प्रबंधन कंपनी के संपर्क में हैं और हालात पर नज़र रखी जा रही है।
जहाज और हमले की जगह
MT GEM NO. 2 (IMO 9735373) 2017 में बना जहाज है, जिसकी क्षमता 302,783 डीडब्ल्यूटी है। इसका प्रबंधन Gem No.2 Maritime Corp करती है। हमले के वक्त टैंकर कच्चे तेल से पूरी तरह लदा हुआ था। घटना 9 अक्टूबर 2026 को करीब 1000 GMT पर हुई, जब जहाज यूएई के अल जज़ीरा से लगभग 13 नॉटिकल मील पश्चिम में था।
अब तक किसी भी समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। पर यह घटना इसलिए अलग दिखती है कि यह होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पारंपरिक खतरे वाले इलाके से बाहर हुई है। यानी क्षेत्र में समुद्री जोखिम का दायरा और फैलता नज़र आ रहा है।
फरवरी 2026 के हमलों के बाद, जिनमें ईरान का शीर्ष नेतृत्व मारा गया, पश्चिम एशिया का संघर्ष तेज़ हुआ है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार तब से क्षेत्र की समुद्री घटनाओं में कम से कम 11 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। अक्टूबर की शुरुआत तक 139 भारतीय नाविक होर्मुज़ इलाके में तैनात थे।
पिछली घटनाएं भी भारतीयों पर भारी पड़ी हैं। ओमान के मुसंदम के पास MV Cape Dao पर हुए हमले में देवरिया (उत्तर प्रदेश) के 26 वर्षीय सूरज यादव की मौत हो गई थी। वहीं MT On Peace पर प्रोजेक्टाइल लगने से 11 भारतीय नागरिक घायल हुए थे।
दुनिया के नाविक कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से ज़्यादा है। किसी भी समय लगभग 23,000 भारतीय नाविक खाड़ी के पानी में काम कर रहे होते हैं। इसी वजह से हर नया हमला भारत के लिए सीधी चिंता बन जाता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ऐसे हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए उनकी निंदा करते रहे हैं। भारत ओमान, यूएई और सऊदी अरब के अधिकारियों से तालमेल बनाकर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगा है। साथ ही भारत ने लाइबेरिया के साथ मिलकर "ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स" बनाया है, ताकि यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर उठाया जा सके।
फिर भी हज़ारों भारतीय कामगार अब भी जोखिम भरे इलाकों में हैं और संघर्ष थमा नहीं है। फरवरी 2026 के आखिर से अब तक 3 लाख से 8 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं, जिससे प्रवासी समुदाय पर दबाव और बढ़ा है।