UAE में बच्चों के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला, शेख मंसूर ने जारी किया नया पारिवारिक चार्टर.

Nura Basta7 September 20262 min read34 viewsUAE
UAE में बच्चों के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला, शेख मंसूर ने जारी किया नया पारिवारिक चार्टर.

संयुक्त अरब अमीरात में माता-पिता के अलग होने के बाद बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद अहम कदम उठाया गया है। देश के उपराष्ट्रपति, उप प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति न्यायालय के अध्यक्ष और अबू धाबी न्यायिक विभाग के अध्यक्ष His Highness Sheikh Mansour bin Zayed Al Nahyan ने 7th September 2026 को एक नया फरमान जारी किया है। इस आदेश के तहत Resolution No. 43 of 2026 को मंजूरी दी गई है, जिसे 'Post-Separation Charter – Year of Family' का नाम दिया गया है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान बच्चों की मानसिक और सामाजिक स्थिति को सुरक्षित रखना है।

माता-पिता की जिम्मेदारियां और बच्चों का पालन-पोषण

इस नए चार्टर के लागू होने के बाद यह साफ कर दिया गया है कि शादी टूटने या पति-पत्नी के अलग होने से बच्चों के प्रति माता-पिता की जिम्मेदारियां खत्म नहीं होती हैं। नियम के मुताबिक दोनों माता-पिता को मिलकर बच्चों की नैतिक और धार्मिक परवरिश, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और उनके व्यवहारिक मार्गदर्शन पर ध्यान देना होगा। जो अभिभावक बच्चे की कस्टडी रखेगा, उसकी यह जिम्मेदारी होगी कि वह दूसरे अभिभावक को स्कूल की गतिविधियों, सेहत की स्थिति और पढ़ाई की रिपोर्ट समय पर दे। इसके अलावा, बच्चों की मेडिकल देखरेख, पढ़ाई और यात्रा जैसे बड़े फैसलों में दोनों की सहमति होना अनिवार्य किया गया है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इन हरियों पर लगाई गई है पूरी पाबंदी

नए नियमों के तहत मां-बाप को बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे यूएई की संस्कृति और संस्कारों के हिसाब से बड़े हो सकें। चार्टर में यह सख्त नियम बनाया गया है कि कोई भी अभिभावक बच्चों के सामने एक-दूसरे की बुराई नहीं करेगा और न ही तलाक के कारणों पर बच्चों के सामने चर्चा करेगा। इसके अलावा, बच्चों से मिलने के अधिकार और उनके खर्च यानी मेंटेनेंस को आपस में बदला लेने या हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। कानून में साफ किया गया है कि बच्चे से मिलने और उससे बातचीत करने का अधिकार दूसरे अभिभावक के पास सुरक्षित रहेगा।

विवाद की स्थिति में अपनाई जाएगी यह प्रक्रिया

यह पूरा दिशा-निर्देश फेडरल पर्सनल स्टेटस लॉ के तहत तैयार किया गया है, जो बच्चों की कस्टडी, मेंटेनेंस, मिलने के अधिकार और पढ़ाई की देखरेख से जुड़े मामलों को संभालता है। यदि माता-पिता के बीच किसी बात को लेकर विवाद होता है, तो उन्हें सबसे पहले आपस में मिलकर मामले को शांति से सुलझाने की कोशिश करनी होगी। अगर आपसी समझौते से बात नहीं बनती है, तो मामले को कानूनी प्रक्रिया में ले जाने से पहले Family Guidance Centre में भेजना अनिवार्य किया गया है ताकि सुलह कराई जा सके। इस प्रक्रिया के तहत फैमिली गाइडेंस काउंसलर अलग हो चुके माता-पिता के सामने इस दस्तावेज को पेश करते हैं और इसके नियमों का पालन करने के लिए उनके हस्ताक्षर लेते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment