UNHRC में उठा सिंध की महिलाओं और बच्चों का मुद्दा, जबरन शादियों के खिलाफ हुई चर्चा.

स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के दौरान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों का गंभीर मुद्दा उठाया गया। इस बैठक में बाल विवाह और जबरन शादियों जैसी कुप्रथाओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया, जिससे वहां के हालात पूरी दुनिया के सामने आए।
जिनेवा में हुआ खास आयोजन
Global Human Rights Defence (GHRD) की कोऑर्डिनेटर Alejandra Martinez Otero ने इस side event की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का शीर्षक “Child Enforced Marriage as a Gender-Based Violence” रखा गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना था, खासकर पाकिस्तान के उन समुदायों के मामलों को उठाना जो लगातार समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख वक्ता शामिल हुए। इनमें बच्चों के यौन शोषण और यौन उत्पीड़न पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपपोर्टयर के साथ-साथ महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ हिंसा पर काम करने वाले वर्किंग ग्रुप के प्रतिनिधि और सिंधी समुदाय के लोग भी मौजूद रहे।
पाकिस्तान सरकार पर मानवाधिकारों की अनदेखी का आरोप
GHRD की कोऑर्डिनेटर Alejandra Martinez Otero ने कहा कि वे पाकिस्तान में persecuted यानी प्रताड़ित होने वाले समुदायों जैसे सिंधी और बलोच समुदाय के अधिकारों की आवाज उठाना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सरकार इन समुदायों के अधिकारों का सम्मान नहीं कर रही है। इस आयोजन का मकसद ऐसे मामलों को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के सामने लाना था ताकि उचित कदम उठाए जा सकें।
सिंध की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की मांग
सिंध से ताल्लुक रखने वाली महिला अधिकार कार्यकर्ता Dr Shagufta Kandhro ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने सिंध की महिलाओं और बच्चियों, विशेष तौर पर कम उम्र और बाल विवाह के मामलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
Dr Shagufta Kandhro ने अपने बयान में कहा कि आज उन्होंने सिंध की महिलाओं और कम उम्र के बाल विवाह से जुड़े मामलों को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अपील की कि वह राज्य के खिलाफ कार्रवाई करे और महिलाओं तथा बच्चों के मानवाधिकारों की रक्षा करे। कार्यक्रम में शामिल अन्य वक्ताओं ने भी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर अधिक ध्यान देने की बात कही, विशेष रूप से उन मामलों में जिनमें शुरुआती और बाल विवाह शामिल हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI की रिपोर्ट देख सकते हैं।