Gulf Conflict Update: मध्य पूर्व के तनाव में 16 भारतीयों की मौत, संसद में सरकार ने दी पूरी जानकारी

खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। 22 सितंबर 2026 को भारतीय सरकार ने संसद में आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से इस साल अब तक सोलह भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्य सभा में यह बात साझा की कि मारे गए लोगों में से दस लोग नाविक यानी सीफारेर्स थे। इस खतरनाक हालात की वजह से वहां रह रहे हमारे प्रवासियों के बीच डर का माहौल बन गया है और हर कोई अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद है।
कहाँ-कहाँ गई जान और कितना हुआ नुकसान
सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ये सभी मौतें अलग-अलग खाड़ी देशों में हुईं हैं। इनमें ओमान में आठ, UAE में चार, कुवैत में दो, सऊदी अरब में एक और इराक में एक भारतीय की मौत शामिल है। इसके अलावा इस संघर्ष की चपेट में आकर कुल पचहत्तर भारतीय नागरिक घायल भी हुए हैं। आपको बता दें कि यह हिंसा फरवरी महीने के आखिर में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। इस तनाव की वजह से UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे तमाम देशों में विमान सेवाएं और जरूरी बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
गल्फ में लगातार बढ़ रहे हैं वर्कप्लेस हादसे
युद्ध से होने वाले नुकसान के अलावा गल्फ देशों में काम के दौरान होने वाले हादसे भी भारतीय मजदूरों की जान ले रहे हैं। साल 2023 से 2025 के बीच विदेशों में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं में 800 से ज्यादा भारतीय मजदूरों की जान जा चुकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें से 55 प्रतिशत हादसे अकेले गल्फ क्षेत्र में हुए हैं, जिसका मतलब है कि हर हफ्ते औसतन तीन मौतें हो रही हैं। अकेले सऊदी अरब में 182 और UAE में 128 मौतें दर्ज की गई हैं। तेलंगाना जैसे राज्यों के मजदूर संगठनों का कहना है कि वहां काम के दौरान सुरक्षा के नियमों का पालन न होना, सही ट्रेनिंग न मिलना, बहुत ज्यादा गर्मी और समय पर मजदूरी न मिलना इन हादसों की मुख्य वजह है।
कतर गैस प्लांट में हुआ बड़ा धमाका
बीते 21 जून 2026 को कतर के रास लाफ्तान इंडस्ट्रियल जोन में कतर एनर्जी के बारजान गैस प्लांट में एक भयानक विस्फोट हुआ था। इस दुर्घटना में बारह भारतीयों और एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि छियासठ लोग घायल हो गए थे। कतर के अधिकारियों ने इसे तोड़फोड़ मानने से इनकार करते हुए कहा था कि प्लांट को दोबारा चालू करने के दौरान यह एक तकनीकी खराबी की वजह से हुआ था। इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में Kozhikode के रहने वाले 30 साल के मैकेनिकल इंजीनियर कलरियाुल्लाथिल अर्जुन भी शामिल थे। सभी बारह भारतीयों के शवों को 26 जून तक उनके अपने वतन वापस भेज दिया गया था।
सरकार दे रही है राहत और सहायता
मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में बताया कि सरकार प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद दे रही है और शवों को वापस लाने के साथ-साथ अस्पताल में इलाज का खर्च भी उठाया जा रहा है। युद्ध क्षेत्र में मारे गए नाविकों के परिवारों को Seafarers Welfare Fund से दस लाख रुपये की एक्स-ग्रेशिया राशि और यूनियन की तरफ से अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जाती है। इसके अलावा मजदूरों की मदद के लिए दिल्ली, दुबई, रियाद और जेद्दा में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र भी चलाए जा रहे हैं। तमाम जोखिमों के बावजूद आज भी नौ से दस मिलियन भारतीय GCC देशों में नौकरी कर रहे हैं। इन प्रवासियों ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 56 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस भारत भेजा है, जो भारत के कुल विदेशी धन का लगभग आधा हिस्सा है।