स्लोवेनिया में इसराइल ने खोला पहला दूतावास, लिजुब्लजाना में हजारों लोगों ने किया भारी विरोध प्रदर्शन.

स्लोवेनिया की राजधानी Ljubljana में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। यह लोग इसराइल द्वारा देश में पहले दूतावास की शुरुआत किए जाने के खिलाफ अपना गुस्सा दिखाने के लिए इकट्ठा हुए थे। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन Iskra Student Society समेत कई अन्य समूहों ने मिलकर किया था। प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को "नो टू द जेनोसाइड एंबेसी" यानी नरसंहार दूतावास नहीं नाम दिया। इस दौरान लोगों के हाथों में स्लोवेनिया और फलस्तीन के झंडे थे और वे इस राजनीतिक फैसले के खिलाफ लगातार नारे लगा रहे थे।
कूटनीतिक बदलाव और आधिकारिक समारोह
यह विरोध प्रदर्शन ठीक उसी समय हुआ जब दूतावास के उद्घाटन का आधिकारिक कार्यक्रम चल रहा था। स्लोवेनिया की दक्षिणपंथी सरकार, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री Janez Jansa कर रहे हैं, की विदेश नीति में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए इस्राइल के विदेश मंत्री Gideon Sa'ar दो दिन के दौरे पर स्लोवेनिया पहुंचे थे। उन्होंने इस दूतावास के खुलने को एक ऐतिहासिक दिन बताया। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने इसराइल को मध्य पूर्व का इकलौता लोकतंत्र और पश्चिमी सभ्यता का सबसे मजबूत पहरेदार करार दिया। उन्होंने यह भी साफ किया कि इसराइल गाजा पट्टी से किसी को भी बाहर निकालने या भगाने की कोई योजना नहीं बना रहा है। साथ ही उन्होंने स्लोवेनिया के साथ दोस्ती के लिए आभार जताया। वहीं स्लोवेनिया के विदेश मंत्री Tone Kajzer ने इस घटना को आपसी बातचीत और मजबूत सहयोग की एक नई शुरुआत बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहिष्कार करने के बजाय बातचीत का रास्ता चुनना ज्यादा जरूरी है।
राजनीतिक घमासान और विरोध
प्रधानमंत्री Janez Jansa ने सत्ता में आते ही पुरानी केंद्र-वामपंथी सरकार के फैसलों को पलटना शुरू कर दिया था। पुरानी सरकार ने साल 2024 में फलस्तीन देश को मान्यता दी थी, साल 2025 में इस्राइल की बस्तियों से आने वाले सामान पर रोक लगाई थी और कई इस्राइली अधिकारियों को देश में आने से मना कर दिया था। अब ताजा घटनाक्रम के बाद विपक्ष की Freedom Movement और The Left पार्टी ने प्रधानमंत्री जंसा के खिलाफ संविधान के तहत कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से केवल इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर
स्लोवेनिया के पूर्व प्रधानमंत्री Robert Golob ने भी दूतावास खोले जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून से दूर जाने की दिशा में उठाया गया एक और गलत कदम है। उन्होंने जंसा सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह यूरोपीय संघ को अवैध बस्तियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाने से रोक रही है। हाल ही में ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर रोक लगाई है, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और इसी माहौल के बीच यह कूटनीतिक कदम उठाया गया है।