सोमालिया ने मदीना में हुए हुती हमले की कड़ी निंदा की

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर आतंकवाद और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हाल ही में, सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना के पास स्थित तइबा बिजली वितरण स्टेशन को निशाना बनाकर किए गए हमले की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी है। इस कायरतापूर्ण हरकत के बाद दुनिया भर के देशों ने सऊदी अरब के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है, और इसी कड़ी में सोमालिया ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
सोमाली विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख
सोमवार को सोमालिया के विदेश मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस बयान में सरकार ने मदीना में हुई इस तोड़फोड़ की घटना की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है। सोमालिया ने स्पष्ट किया कि इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में से एक की सेवा करने वाले बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना न केवल उसकी पवित्रता का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी खुला उल्लंघन है।
बयान में आगे कहा गया कि सोमालिया की सरकार और जनता इस मुश्किल समय में सऊदी अरब के साथ पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ खड़े हैं। सोमालिया ने साम्राज्य की सुरक्षा, शांति और उसके पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए सऊदी प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे हर संप्रभु कदम का समर्थन करने की बात दोहराई है।
क्या हुआ था उस दिन?
यह हमला सुबह के वक्त हुआ था जब तइबा बिजली स्टेशन को एक ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। इस घटना के कारण बिजली का एक ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होकर सेवा से बाहर हो गया था, हालांकि गनीमत यह रही कि बिजली नेटवर्क का बाकी हिस्सा सुचारू रूप से काम करता रहा और बड़ा संकट टल गया।
सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने जांच और घटनास्थल से बरामद ड्रोन के मलबे के आधार पर इस हमले के पीछे हुती मिलिशिया का हाथ होने की पुष्टि की थी। गठबंधन ने इस पूरी कार्रवाई को एक कायरतापूर्ण आतंकवादी कृत्य करार दिया है। हालांकि, दूसरी ओर हुती सैन्य सूत्रों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक मनगढ़ंत कहानी बताया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन
इस निंदनीय घटना के बाद केवल सोमालिया ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, तुर्की, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), अल-अजहर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सऊदी अरब के प्रति अपना समर्थन जताया है। वैश्विक मंच पर इस बात पर जोर दिया गया है कि नागरिक ठिकानों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर इस तरह के हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं।