सोमालियाई राष्ट्रपति मोहमुद ने इस्राइली उपस्थिति को नकारा

अफ़्रीकी महाद्वीप के रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश सोमालिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह अपनी धरती पर किसी भी परिस्थिति में इस्राइल की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा। सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहमुद ने एक साक्षात्कार के दौरान इस बात की दो टूक घोषणा की है। उन्होंने क्षेत्र में हालिया भू-राजनीतिक गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
सोमालीलैंड और इस्राइल के बीच बढ़ती नजदीकियां
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब इस्राइल ने एक बड़े कूटनीतिक कदम के तहत सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की घोषणा की। सोमालिया इस breakaway क्षेत्र को अपने देश का हिस्सा मानता है। इस घटनाक्रम के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमाली नेतृत्व का मानना है कि इस कदम के पीछे भू-राजनीतिक और रणनीतिक उद्देश्य छिपे हुए हैं, जो हॉर्न ऑफ अफ्रीका की शांति को प्रभावित कर सकते हैं।
सैन्य अड्डे और क्षेत्रीय कूटनीति
विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे लाल सागर और अदन की खाड़ी में सुरक्षा समीकरण एक बड़ी वजह हैं। इस्राइल की इस क्षेत्र में दिलचस्पी मुख्य रूप से रणनीतिक निगरानी और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखने से जुड़ी बताई जा रही है। वहीं, दूसरी ओर क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन साधने की कोशिशें भी जारी हैं। सोमालिया की सरकार ने लगातार इस बात का विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इस तरह के कदम क्षेत्र में संघर्ष को और हवा दे सकते हैं।
फिलहाल, राष्ट्रपति मोहमुद के इस कड़े बयान से यह साफ हो गया है कि सोमालिया अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में इस कूटनीतिक खिंचाव के हॉर्न ऑफ अफ्रीका की राजनीति पर गहरे असर देखने को मिल सकते हैं।