दक्षिण कोरिया ने चोंगहे यूनिट का दायरा दोगुना कर 1,930 किमी किया, ओमान तक होगी तैनाती

दक्षिण कोरिया ने समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए चोंगहे यूनिट का दायरा बढ़ाने और सैन्य ताकत बढ़ाने की योजना बनाई है।

Gautam Sahu5 November 20262 min read0 viewsWorld
दक्षिण कोरिया ने चोंगहे यूनिट का दायरा दोगुना कर 1,930 किमी किया, ओमान तक होगी तैनाती

सियोल: दक्षिण कोरिया ने समुद्री लुटेरों के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए अपनी नौसेना की एंटी-पायरेसी यूनिट 'चोंगहे' के ऑपरेशनल दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को इस योजना की घोषणा की, जिसके तहत अब यह यूनिट अदन की खाड़ी से आगे बढ़कर ओमान के दुक्म पोर्ट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक तैनात रहेगी।

इस विस्तार के बाद चोंगहे यूनिट का ऑपरेशनल रेडियस लगभग 1,930 किलोमीटर हो जाएगा, जो पहले के मुकाबले दोगुना है। मिशन को मजबूती देने के लिए सरकार यूनिट में 75 नए सदस्य जोड़ने जा रही है, जिससे कुल सैन्य ताकत 395 हो जाएगी।

सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए यूनिट को P-8A समुद्री गश्ती विमान, एक विस्फोटक निपटान (EOD) टीम और सतह व पानी के नीचे काम करने वाले कई मानवरहित माइन-क्लियरिंग सिस्टम दिए जाएंगे। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि 2025 में समुद्री लुटेरों की 11 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2026 में बढ़कर 36 हो गई हैं। अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

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5 नवंबर को उप-मंत्रियों की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद, अब यह प्रस्ताव कैबिनेट और राष्ट्रपति के पास जाएगा, जिसके बाद संशोधित जनादेश के लिए इसे नेशनल असेंबली भेजा जाएगा। चोंगहे यूनिट की वर्तमान तैनाती 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।

रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक और गैर-लड़ाकू है, जो दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के तहत स्वतंत्र रूप से काम करेगा। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि P-8A विमान को ईरानी क्षेत्र या होर्मुज जलडमरूमध्य के आंतरिक हिस्से की निगरानी या लक्ष्य बनाने की अनुमति नहीं होगी। नए ऑपरेशनल जोन में होर्मुज जलडमरूमध्य को शामिल नहीं किया गया है।

माइन-क्लियरिंग संपत्तियों को भविष्य में नेविगेशन बहाली की तैयारी के तौर पर तैनात किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर किसी भी संभावित ऑपरेशन के लिए अलग से संसदीय मंजूरी और अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत होगी, जैसे कि अमेरिका-ईरान युद्ध का समाप्त होना या संबंधित पक्षों के बीच औपचारिक समझौते होना।

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