दक्षिणी लेबनान में गहराया आर्थिक संकट, मिलिट्री हमलों के बीच कारोबारियों के सामने वजूद बचाने की बड़ी चुनौती।

दक्षिणी लेबनान के कारोबारियों के सामने इन दिनों जीने और अपने काम को बचाने की बहुत बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है। लगातार हो रहे मिलिट्री हमलों और गोलाबारी की वजह से वहां के लोगों का जनजीवन पूरी तरह से बिखर गया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्थानीय बाजारों से ग्राहक गायब हो चुके हैं और सामान लाने-ले जाने वाले रास्ते भी पूरी तरह बंद हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जो लोग अपने घरों और इलाकों में अभी भी रुके हुए हैं, उनके लिए अपना गुजर-बसर करना और रोजी-रोटी चलाना बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया है। छोटे-छोटे काम करने वाले लोग, जैसे कि अडूसोइर इलाके के पनीर बनाने वाले नबील कोरियन, सामान की भारी कमी और बढ़ती कीमतों से बुरी तरह जूझ रहे हैं। किसानों को तो अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए मजबूरी में अपने पालतू मवेशी तक बेचने पड़ रहे हैं।
मिलिट्री एक्शन और बिगड़ते हालात
यह आर्थिक संकट ऐसे समय में सामने आया है जब वहां सैन्य गतिविधियां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। 18 सितंबर 2026 को इस्रायली सेना ने मंसूरी और मजदौल जौउ सहित कई शहरों पर लगातार तोप से गोले दागे, और टायर तथा उसके आसपास के इलाकों में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। बिन्त जबील जिले में इस्रायली सैन्य गाड़ियों को तीरी से हदथा की तरफ आगे बढ़ते हुए भी देखा गया है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने चेतावनी दी है कि ये हमले जून में अमेरिका की मध्यम से तय हुए उस समझौते को कमजोर कर रहे हैं, जिसका मकसद इस्रायली सेना को पीछे हटाना और लेबनान की सेना को तैनात करना था।
लेबनान सरकार और संयुक्त राष्ट्र की मदद
इस बड़ी आपदा से निपटने के लिए लेबनान सरकार और यूनाइटेड नेशन्स ने मिलकर 18 सितंबर 2026 को 'Lebanon Response Plan 2026 Addendum' नाम से एक राहत योजना जारी की। इस योजना के तहत साल के बाकी बचे समय के लिए 385.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद मांगी गई है, ताकि 732,125 लोगों को जरूरी सहायता पहुंचाई जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2026 से जारी इन हमलों की वजह से बुनियादी ढांचे को बहुत नुकसान पहुंचा है और जरूरी सेवाएं भी ठप हो गई हैं। हालांकि लगभग 860,000 लोग अपने घरों को वापस लौट आए हैं, लेकिन फिर भी करीब 360,000 लोग अभी भी अपने घरों से दूर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।
जमीन बेचने पर रोक और कूटनीतिक कोशिशें
क्षेत्र के लंबे समय के हितों को सुरक्षित रखने के लिए लेबनान सरकार ने एक नए कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसका मकसद दक्षिणी लेबनान के इस्रायली कब्जे वाले इलाकों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाना है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आर्थिक तंगी की वजह से अगर कोई जमीन का मालिक अपनी जमीन बेचने पर मजबूर हो, तो वह संपत्ति इस्रायल के हाथ में न जाने पाए। इसके साथ ही, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी तेज हो गई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने पेरिस में राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात की। यह बैठक 17 और 18 सितंबर को हुई, जिसमें लेबनान की सुरक्षा जरूरतों और जनवरी 2027 में होने वाली UNIFIL की तय वापसी से पहले दक्षिण लेबनान के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा की गई।