श्रीलंका ने तट के पास फंसे 19 जहाजों से 40 ईरानी नाविकों को सुरक्षित उनके देश भेजा
श्रीलंका ने तट के पास फंसे 40 ईरानी नाविकों को बचाकर उनके देश वापस भेजा। अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच यह मानवीय मदद दी गई।

कोलंबो: श्रीलंका ने अपने तट के पास फंसे 19 कमर्शियल जहाजों से 40 ईरानी नाविकों को बचाकर उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इन नाविकों को शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को गाल हार्बर लाया गया था, जिसके बाद कोलंबो में इलाज मिलने के बाद वे रविवार सुबह रवाना हो गए।
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तुषारा रोड्रिगो ने बताया कि सरकार ने यह कदम ईरानी दूतावास से मिले औपचारिक अनुरोध के बाद उठाया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ये नाविक उन तेल टैंकरों पर फंसे थे जिन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं।
श्रीलंकाई अधिकारियों ने पहले स्वीकार किया था कि 19 जहाज तट से करीब 24 समुद्री मील दूर मौजूद थे। वहां मौजूद चालक दल के पास भोजन, पानी और ईंधन की भारी कमी हो गई थी। हालांकि, अमेरिकी सेकेंडरी सैंक्शंस और राष्ट्रीय हितों की चिंता के कारण सरकार ने इस मदद को लेकर शुरू में सावधानी बरती थी।
कोलंबो स्थित ईरानी दूतावास ने इस पूरी प्रक्रिया के लॉजिस्टिक्स का समन्वय किया। नाविकों को ले जाने वाले जहाजों का इंतजाम और उससे जुड़े सभी खर्चों का भुगतान भी दूतावास ने ही किया।
विदेश मंत्री विजित हेराथ ने कहा कि श्रीलंका राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करते हुए और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करते हुए ऐसे अभियान चलाता है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने जोर दिया कि सरकार हर जीवन को कीमती मानती है और अंतरराष्ट्रीय संधियों के आधार पर मानवीय सहायता का मूल्यांकन करती है।
साल 2026 में यह पहला समुद्री बचाव अभियान नहीं है। इससे पहले 4 मार्च को ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था, जिसके बाद श्रीलंका ने 32 जीवित बचे लोगों और 80 से अधिक चालक दल के सदस्यों के शवों को उनके देश वापस भेजा था।