श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के 7 मछुआरों को पकड़ा, एसोसिएशन ने केंद्र से मांगी मदद

श्रीलंकाई नौसेना ने समुद्री सीमा पार करने के आरोप में रामेश्वरम के 7 मछुआरों को हिरासत में लिया है। एसोसिएशन ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की।

Gautam Sahu1 November 20262 min read0 viewsWorld
श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के 7 मछुआरों को पकड़ा, एसोसिएशन ने केंद्र से मांगी मदद

रामेश्वरम (तमिलनाडु): श्रीलंकाई नौसेना ने उत्तरी समुद्री क्षेत्र में मानर के पास रामेश्वरम के सात मछुआरों को हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई के दौरान उनकी मछली पकड़ने वाली नाव को भी जब्त कर लिया गया है, जिससे स्थानीय मछुआरा समुदाय में भारी आक्रोश है।

यह घटना शनिवार, 31 अक्टूबर को हुई। पकड़ी गई नाव का रजिस्ट्रेशन नंबर IND TN 10 MM 984 है, जो थांगचीमडम के एंथोनीपुरम के जे मर्विन की है। श्रीलंकाई नौसेना ने इन मछुआरों पर समुद्री सीमा पार कर मछली पकड़ने का आरोप लगाया है और उन्हें पूछताछ के लिए मानर नेवल कैंप ले जाया गया है।

पकड़े गए मछुआरों की पहचान नाव चालक एस प्लासियस (41), ए मेलसन (56), एस अलगु पांडी (22), ए एंथोनी पिचाई (33), जे रबिन (21), ए सखया आनंद (34) और आर अरुलनंदु जेवियर (65) के रूप में हुई है। इनमें से कुछ मछुआरे थांगचीमडम और रामेश्वरम के विभिन्न इलाकों के रहने वाले हैं।

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रामेश्वरम मछुआरा संघ के अध्यक्ष एन देवदास ने बताया कि चक्रवात की चेतावनी के कारण मछुआरे चार दिनों तक समुद्र में नहीं जा पाए थे। शनिवार को जब चेतावनी हटी, तो रामेश्वरम से 400 से ज्यादा नावें मछली पकड़ने के लिए निकली थीं। उन्होंने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना ने चक्रवात के दौरान अपनी कार्रवाई रोक दी थी, लेकिन अब फिर से एक नाव और सात मछुआरों को पकड़ लिया गया है।

देवदास ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि मछुआरा समुदाय बहुत परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीलंकाई अधिकारी जब्त की गई नावों को राष्ट्रीयकृत कर देते हैं और फिर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। उनके मुताबिक, अब तक इस तरह से 300 से अधिक नावें नष्ट की जा चुकी हैं।

केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए देवदास ने कहा कि राज्य सरकार 8 लाख रुपये का मुआवजा देती है, लेकिन केंद्र सरकार केवल मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे ताकि रोजी-रोटी के लिए समुद्र में जाने वाले मछुआरों की गिरफ्तारी और उनकी नावों की जब्ती रुक सके।

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