सुपौल में एसएसबी जवानों को नकली भारतीय मुद्रा की पहचान करना सिखाया गया ताकि सीमा पर जाली नोटों की तस्करी रोकी जा सके

सुपौल: भारत और नेपाल की सीमा पर सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए गुरुवार को बीरपुर में 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद नकली भारतीय मुद्रा के चलन पर रोक लगाना था।
ट्रेनिंग के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), बीरपुर के कर्मियों ने जवानों को नकली भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) की पहचान करने के तरीके बताए। बैंक कर्मियों ने विस्तार से जानकारी दी कि असली और नकली नोटों के बीच अंतर कैसे पहचाना जाए और इस दौरान किन सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है।
जवानों को नोटों की सुरक्षा विशेषताओं की जांच करने और संदिग्ध मुद्रा के प्रति सतर्क रहने के टिप्स दिए गए। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने बताया कि नकली नोटों का चलन देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और जाली नोटों को पहचानना बहुत जरूरी है।
इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व 45वीं वाहिनी एसएसबी, बीरपुर के कार्यवाहक कमांडेंट जगदीश शर्मा ने किया। उनके मार्गदर्शन में जवानों को वित्तीय जागरूकता और नकली नोटों की पहचान से जुड़ी अहम जानकारियां दी गईं।
45वीं वाहिनी एसएसबी ने कहा कि जवानों की सतर्कता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।