Strait of Hormuz Attack: होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों के बाद ईरान की चेतावनी, भारत समेत कई देशों के प्रवासियों पर असर

फारस की खाड़ी में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने सोमवार को यह साफ कर दिया है कि अगर भविष्य में अमेरिका की तरफ से कोई भी दखल दिया गया, तो युद्ध का भूगोल पूरी तरह से बदल जाएगा। इस नए हालात में नए हथियारों और उन जगहों को निशाना बनाया जाएगा जो अब तक सुरक्षित थीं। होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई दो अलग-अलग घटनाओं के बाद यह बयान सामने आया है, जहां एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ और एलपीजी कैरियर मलबे की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि दोनों जहाज चालू हालत में हैं और तेल का कोई रिसाव नहीं हुआ है।
प्रवासियों और शिपिंग सेक्टर पर मंडराया खतरा
इस पूरे इलाके में तनाव उस संघर्ष की वजह से है जो 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुआ था। इन हमलों ने बाद के संघर्ष विराम और जून के समझौते को कमजोर कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल ले जाने का एक बहुत जरूरी रास्ता है, जो अब जंग का मैदान बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर उस मेहनतकश आबादी पर पड़ रहा है जो भारत, फिलीपींस, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आकर खाड़ी देशों में शिपिंग और लॉजिस्टिक्स का काम संभालती है। कामगारों के लिए यात्रा में मुश्किलें बढ़ गई हैं और उनके मन में आर्थिक असुरक्षा को लेकर चिंता भी पैदा हो गई है।
ऊर्जा केंद्रों और ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना
IRGC के अधिकारी ने यह भी संकेत दिया है कि वे एक लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके निशाने पर ऊर्जा टर्मिनल, बंदरगाह और वे एयर बेस आ सकते हैं जहां अमेरिका के ठिकाने मौजूद हैं। इन देशों में अबूझधाबी, मस्कट, बहरीन, कतर, यूएई, कुवैत और जॉर्डन शामिल हैं। इसके साथ ही, हूती ताकतें बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर कब्जा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सऊदी अरब को एक साथ दो मोर्चों पर प्रॉक्सी युद्ध का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के बाद उन्हें अपने कच्चे तेल का रास्ता बदलना पड़ रहा है।
राहत और कूटनीतिक कोशिशें जारी
बढ़ते तनाव के बीच कतर उन देशों के साथ मिलकर जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ओमान इसमें बीच-बचाव की भूमिका निभा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान के साथ अपने व्यापार और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से रोक दिया है और सऊदी अरब ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। खाड़ी देशों के अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्र में आने-जाने की आजादी की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए। हालांकि IRGC का दावा है कि अब इस पूरे इलाके के हालात वही तय करेंगे। बाजार इस हाई-रिस्क गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आगे के हालात का अंदाजा लगाया जा सके।