हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव गहराया, ईरान ने कहा जब तक शर्तें पूरी नहीं होंगी रास्ता रहेगा बंद

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि Strait of Hormuz यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आम कमर्शियल जहाजों की आवाजाही तब तक बंद रहेगी जब तक तेहरान की शर्तें नहीं मानी जातीं और अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं करता। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 20 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की गई कि यह अहम समुद्री मार्ग अभी बंद रहेगा। संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने कहा कि देश अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सैन्य ताकत और कूटनीति दोनों का इस्तेमाल करेगा। इस बीच ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Abolfazl Shekarchi ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह झूठा बताया है।
जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट और जवाबी कार्रवाई
इस रास्ते के बंद होने से समुद्री व्यापार पर बहुत असर पड़ा है। IMF PortWatch के आंकड़ों के अनुसार 13 सितंबर को इस जलडमरूमध्य से केवल 8 जहाज गुजरे जबकि संकट से पहले रोज औसतन 85 जहाज निकलते थे। पिछले 24 घंटे के डेटा से पता चलता है कि केवल 6 ऐसे जहाज बचे हैं जिनके ट्रांसपोंडर चालू हैं। अमेरिका द्वारा ईरान के 5 तेल टैंकरों को डुबोए जाने के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इस क्षेत्र के पास 10 जहाजों पर हमले किए। दूसरी तरफ अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने फारस की खाड़ी से एक अरब बैरल तेल और 2,000 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित निकाला है, जिसे ईरानी अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने ओमान सागर तक अपना नया प्रतिबंध क्षेत्र भी बना लिया है।
ईरान की शर्तें और क्षेत्रीय देशों की मध्यस्थता
ईरान ने जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए कई बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें उसके कम से कम 12 अरब डॉलर के जमे हुए फंड को जारी करना, अमेरिकी तेल प्रतिबंधों में ढील देना, लेबनान से इजरायली सैनिकों की पूरी तरह वापसी और युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा तेहरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म हो, यमन और सऊदी अरब के बीच का संघर्ष थमे और इस रास्ते पर किसी भी सैन्य जहाज की आवाजाही पर रोक लगे। कमर्शियल जहाजों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के साथ तालमेल बिठाना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओमान, कतर और पाकिस्तान इस मामले को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। ओमान और जर्मनी के बीच भी इस मार्ग पर नेविगेशन की आजादी को लेकर चर्चा हुई है। इन हालात को देखते हुए मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।