स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहेगा बंद, अमेरिका से मांग पूरी होने तक ईरान का कड़ा रुख

दुनियाभर के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले समुद्री रास्ते को लेकर तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबिफ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं और अमेरिका अपने वादों पर खरा नहीं उतरता, तब तक Strait of Hormuz closure का फैसला बरकरार रहेगा। इस ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है।
राजकीय प्रस्ताव और वाशिंगटन की प्रतिक्रिया
यह पूरा गतिरोध तब शुरू हुआ जब ईरान को वाशिंगटन से एक राजनयिक प्रस्ताव का औपचारिक जवाब मिला। तेहरान ने पहले ही संघर्ष विराम और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआती शर्तों को अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया था और एक व्यापक समझौते की मांग की थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर खींचतान जारी है।
ईरान की सात प्रमुख शर्तें और कूटनीतिक प्रयास
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई के अनुसार, देश की मांगें इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर आधारित हैं, जिन्हें ओमान, कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- सभी मोर्चों पर शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत रोका जाए।
- वर्तमान नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाए।
- ईरान की रोकी गई संपत्ति और फंड को तुरंत रिहा किया जाए।
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन का रुख भी काफी सख्त बना हुआ है। पेंटागन और शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जलमार्ग की नाकेबंदी को लेकर उनकी नीति अभी भी सख्त है और सैन्य विकल्पों सहित सभी रास्ते खुले रखे गए हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा और बढ़ता आर्थिक दबाव
इस बीच, आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा, शिपिंग, टेक्नोलॉजी, गोल्ड और डिजिटल-एसेट सेक्टर को निशाना बनाते हुए प्रतिबंधों का दायरा और चौड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में हालात के और अधिक जटिल होने की आशंका जताई जा रही है।