हॉर्मुज में तीन दिन में तीन हमले, जहाजों की आवाजाही 135 से घटकर 2 रह गई
Strait of Hormuz में जहाजों पर हमलों से बढ़ा खतरा। IMO के मुताबिक ट्रैफिक गिरा, अमेरिका और ईरान के बीच दावों में टकराव।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz में कमर्शियल शिपिंग के लिए सुरक्षा जोखिम और लागत काफी बढ़ गई है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि यह जलमार्ग खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत और हालिया हमलों ने जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुद्री क्षेत्र में अस्थिरता इतनी बढ़ गई है कि 1 नवंबर को एक जहाज अज्ञात मिसाइल की चपेट में आया। इससे ठीक पहले 30 अक्टूबर को कतरी गैस टैंकर 'अल मयदा' पर भी अज्ञात वस्तुओं से हमला किया गया था। इसके अलावा, 1 नवंबर की शाम को रास अल-खफजी से 72 समुद्री मील पूर्व में स्थित एक अन्य टैंकर पर दो प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ।
सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा अंतर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के एडमिरल ब्रैड कूपर ने 30 अक्टूबर को कहा कि मुख्य ट्रांजिट लेन से बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं और ये रास्ते अमेरिकी सुरक्षा में काम कर रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी ने 1 नवंबर को दावा किया कि दो तेल टैंकर उन रास्तों पर चलने के कारण बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर फट गए, जिन्हें तेहरान अनाधिकृत मानता है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के सुरक्षा दावों को खारिज करते हुए कहा है कि जहाजों को उनके विशेष समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को साफ दर्शाते हैं। महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने 1 नवंबर को बताया कि यह जलडमरूमध्य असुरक्षित बना हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि जहाजों की आवाजाही, जो पहले प्रतिदिन लगभग 135 थी, वह 29 अक्टूबर तक गिरकर महज दो जहाजों तक रह गई।
क्विंसी इंस्टीट्यूट के विश्लेषक ट्रिटा पारसी के मुताबिक, ईरान का इस रास्ते पर काफी नियंत्रण है और वह इसे बड़े समझौतों के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में देख रहा है।
रास्ते को पूरी तरह खोलने के लिए ईरान ने कुछ शर्तें रखी हैं। ईरान ने मांग की है कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, तेल प्रतिबंधों को खत्म करे और लेबनान सहित युद्धविराम लागू किया जाए। 2 नवंबर 2026 तक इस क्षेत्र में तनाव बरकरार है और राजनयिक प्रयास अब तक विफल रहे हैं।