हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला, बढ़ता तनाव बना बड़ी चिंता

Gautam Sahu30 September 20262 min read1 viewWorld
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला, बढ़ता तनाव बना बड़ी चिंता

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में हुई घटनाओं की श्रृंखला में कई जहाजों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल्स (प्रक्षेप्य) से हमले किए गए हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ गया है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (UKMTO) ने पुष्टि की है कि मंगलवार को एक क्रूड ऑयल टैंकर सहित तीन जहाजों को निशाना बनाया गया।

लगातार हो रहे हमलों से मचा हड़कंप

समुद्री मार्ग पर हमलों का सिलसिला पिछले कुछ दिनों से जारी है। रिपोर्टों के अनुसार:

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  • सोमवार की घटना: कुवैती विशाल क्रूड कैरियर (VLCC) 'AL FUNTAS' पर हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई थी। हालांकि, बाद में आग पर काबू पा लिया गया।
  • मंगलवार की घटना: एक क्रूड ऑयल टैंकर और दो अन्य जहाजों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल्स से हमला किया गया।
  • अन्य निशाने: भारतीय ध्वज वाले जहाजों और कतर के स्वामित्व वाले एक टैंकर को भी निशाना बनाने की खबरें आई हैं।

इस बीच, ओमान की रॉयल नेवी सऊदी ध्वज वाले तेल टैंकर 'Sidr' पर हुए हमले के बाद सहायता और चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रही है। उपग्रह चित्रों से कुमज़ार और क्वोइन द्वीपों के बीच तेल के रिसाव (oil slick) की पुष्टि भी हुई है।

ईरान की चेतावनी और बढ़ता सैन्य तनाव

इस घटनाक्रम के बीच ईरान की स्थिति और भी आक्रामक हो गई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेबी ने दावा किया है कि यह जलडमरूमध्य अब IRGC नौसेना के लिए एक "शिकार का मैदान" बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह जलमार्ग सभी के लिए खुला नहीं है और गुजरने वाले जहाजों को नुकसान पहुँचाया जा सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान का इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण नहीं है। अमेरिका ने अगस्त में ही एक अधिकृत शिपिंग रूट स्थापित किया था ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

क्या सुलझ सकता है विवाद?

तनाव के इस माहौल के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची वर्तमान में अमेरिका के एक प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। यह प्रस्ताव सात दिनों के युद्धविराम और जलडमरूमध्य को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने से संबंधित है।

कतर के मध्यस्थों के साथ हुई बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव पेश किया गया है। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि जून में तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुआ पिछला समझौता विफल हो गया था। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस समुद्री संकट को टाल पाएगी या नहीं।

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