Sudan से जुड़ा हैं Dubai में आने वाला सस्ता सोना, UAE पर फिर लग सकता हैं प्रतिबंध. Gold के लिए बर्बाद कर दिया.

दुबई/खारतूम: दुबई का सोना बाज़ार दुनिया भर में अपनी चमक और सस्ती कीमतों के लिए मशहूर है। हर साल लाखों भारतीय और प्रवासी दुबई से सोना खरीदकर अपने वतन ले जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह सोना इतना सस्ता क्यों पड़ता है? अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट्स और UN के अपने डेटा में जो खुलासा हुआ है, वह चौंकाने वाला है — इसका एक बड़ा कनेक्शन सूडान की खूनी जंग से जुड़ता है।
सूडान में जारी जंग — RSF बनाम सेना
सूडान पिछले कई सालों से रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) नाम की अर्धसैनिक मिलिशिया और सूडानी सेना (SAF) के बीच भीषण गृहयुद्ध में फंसा हुआ है। इस जंग ने 1.5 करोड़ से ज़्यादा लोगों को विस्थापित किया है और हज़ारों जानें ले चुकी है। पर इस जंग को ज़िंदा रखने वाला असली "ईंधन" कुछ और नहीं, बल्कि सोना है।

दारफूर की खदानों से दुबई तक — सोने का काला सफर
RSF ने दारफूर और कोर्डोफान जैसे इलाकों की सोने की खदानों पर कब्ज़ा कर रखा है। यहां से निकाला गया सोना अनऑफिशियल रास्तों से चाड, लीबिया, दक्षिण सूडान और मिस्र होते हुए UAE पहुंचाया जाता है। कई मामलों में तो खदानों के पास बनी अवैध हवाई पट्टियों से सीधे छोटे कार्गो विमानों के ज़रिए यह सोना बिना किसी जांच के निर्यात कर दिया जाता है।
आंकड़े बयां कर रहे हैं पूरी सच्चाई
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- अनुमान है कि 90% तक स्मगल किया गया सूडानी सोना, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से UAE ही पहुंचता है
- UN Comtrade डेटा के मुताबिक, 2024 में UAE ने सीधे सूडान से 29 टन सोना आयात किया — जो 2023 के मुकाबले (17 टन) लगभग दोगुना है
- इसके अलावा मिस्र (27 टन), चाड (18 टन) और लीबिया (9 टन) के ज़रिए भी बड़ी मात्रा में सूडानी सोना UAE पहुंचा — ये देश दरअसल RSF-नियंत्रित सोने के लिए "एग्ज़िट पॉइंट" का काम करते हैं
- 2024-25 में RSF-नियंत्रित इलाकों से स्मगल किए गए सोने की कीमत $850 मिलियन (करीब 7,000 करोड़ रुपये) से ज़्यादा आंकी गई है
दुबई की कंपनियां बनीं "लॉन्ड्रिंग मशीन"?
द सेंट्री (The Sentry) की एक जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर कई दुबई-आधारित कंपनियों को RSF फाइनेंसरों के लिए अवैध सूडानी सोने की लॉन्ड्रिंग करने से जोड़ा गया है। लंदन के थिंक टैंक चैथम हाउस ने मार्च 2025 की अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा — "सोने का यह अरबों डॉलर का व्यापार ही सूडान के संघर्ष को बनाए रखता है और उसे आकार देता है।"
"सोना खरीदो, हथियार खरीदो" — जंग का खतरनाक चक्र
सबसे डरावनी बात यह है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सोने से हुई कमाई का इस्तेमाल ड्रोन, गाइडेड मिसाइल और दूसरे घातक हथियार खरीदने में किया जाता है — जिनका इस्तेमाल फिर दारफूर जैसे इलाकों में नरसंहार और जातीय सफाए जैसी वारदातों में होता है। यानी जो चेन या अंगूठी आप खुशी-खुशी खरीद रहे हैं, हो सकता है उसकी जड़ें कहीं न कहीं उसी खूनी ज़ंजीर से जुड़ी हों।
UAE पर पहले भी लग चुकी है FATF की "ग्रे लिस्ट" की तलवार
गौर करने वाली बात यह है कि 2022 से 2024 तक UAE खुद FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की "ग्रे लिस्ट" में शामिल रहा — जिसकी एक बड़ी वजह गोल्ड ट्रेडिंग और फ्री ज़ोन में ढीली निगरानी बताई गई थी। हालांकि UAE ने OECD मानकों के मुताबिक नए नियम लागू करने के बाद इस लिस्ट से बाहर निकल गया, पर स्विसएड (Swissaid) जैसी संस्थाओं का कहना है कि ज़मीनी हकीकत में बहुत कुछ नहीं बदला — 2026 में भी UAE की अगली FATF समीक्षा होनी बाकी है।