Sundarbans News: सुंदरबन में बढ़ता समुद्र का पानी, खतरे में पारंपरिक जड़ी-बूटियां और पौधे

बांग्लादेश के सुंदरबन मैंग्रोव वन में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण गंभीर संकट पैदा हो गया है। दुनिया के इस सबसे बड़े मैंग्रोव जंगल में खारा पानी लगातार अंदर आ रहा है, जिससे वहां की बहुमूल्य और पारंपरिक औषधीय वनस्पतियां तेजी से खत्म हो रही हैं। Al Jazeera English द्वारा 11 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट 'The vanishing pharmacy of the Sundarbans' में इस बात का खुलासा किया गया है कि कैसे यह प्राकृतिक खजाना धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है।
खारे पानी बढ़ने से बदल रही है जंगल की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच प्री-मानसून सीजन के दौरान ज्वार के पानी में लवणता यानी खारापन 21 से बढ़कर 33 पार्ट्स प्रति हजार हो गया था। इसके साथ ही मिट्टी की लवणता में भी 31 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बदलाव के कारण जो पौधे नमक पसंद करते हैं, वे तो फैल रहे हैं, लेकिन जो नाज़ुक और जीवन रक्षक जड़ी-बूटियां थीं, वे अब गायब होने लगी हैं।
शेर-ए-बांग्ला कृषि विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर एमडी अब्दुर रहीम ने बताया कि नमक धीरे-धीरे पूरे जंगल के स्वरूप को बदल रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत पेड़ शायद टिक जाएं, लेकिन जो पौधे इलाज के काम आते थे और जिन पर हमारे पारंपरिक वैद्य भरोसा करते थे, वे अब नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने सुंदरबन के प्रमुख पेड़ सुंदरी (Heritiera fomes) के कम होने को एक सांस्कृतिक घाव बताया है। स्थानीय पारंपरिक healers, जिन्हें कबीराज कहा जाता है, उनमें से 40 साल के सुरंजन राप्टन का कहना है कि अब समुदाय के इलाज के लिए जरूरी पौधों को ढूंढना बहुत मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, बैन (Avicennia officinalis) जैसे पौधे कुछ इलाकों में फूल देना बंद कर चुके हैं और खारे पानी के घुसने की वजह से स्क्रू पाइन (Pandanus tectorius) इस क्षेत्र में अब विलुप्त मान लिया गया है।
पर्यावरण और आम लोगों की सेहत पर असर
पर्यावरण के खराब होने का असर सीधे तौर पर आम आदमी की सेहत पर भी पड़ रहा है। पीने के पानी में सोडियम की मात्रा बढ़ने से स्थानीय लोगों में ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जुलाई 2026 के शोध से यह बात सामने आई है कि ताजे पानी के दलदली वन खत्म हो चुके हैं और तालाबों का पानी भी पूरी तरह खारा हो चुका है। एक शोधकर्ता उद्दीन ने बताया कि सुंदरबन औषधीय पौधों का खजाना है और इनका खत्म होना फार्मास्यूटिकल रिसर्च के लिए समय के खिलाफ एक बड़ी दौड़ जैसा है।
इन सभी गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को देखते हुए बांग्लादेश वन विभाग और IUCN Bangladesh ने Agence Française de Développement (AFD) की मदद से जून 2026 में कंजर्वेशन एंड रेस्टोरेशन इनिशिएटिव्स इन द सुंदरबन रीजन यानी CRIS प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। संयुक्त राष्ट्र की जलवायु संस्था UNFCCC ने भी इन प्रभावों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है, जिसमें स्थानीय ज्ञान, पहचान और जैव विविधता का नुकसान शामिल है, जिसे जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाला 'नॉन-इकोनॉमिक लॉस' यानी गैर-आर्थिक नुकसान माना गया है। इसके अलावा, 2025 के एक अध्ययन में भी वन्यजीवों में कमी और पारंपरिक औषधियों के गायब होने को लेकर लोगों की चिंताओं को दर्ज किया गया था।