Sydney Protest: सिडनी में उमड़ी भारी भीड़, इसराइल के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग

ऑस्टेलिया के सिडनी शहर में गाजा में चल रहे संघर्ष और वहां के हालातों को लेकर हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। 13 सितंबर 2026 को सिडनी के Hyde Park में इकट्ठा हुए इन प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वह इसराइल के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लागू करे। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य गाजा में जारी हिंसा और मानवीय सहायता कर्मियों की सुरक्षा को लेकर सरकार पर दबाव बनाना था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन करने की बात कही।
सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी
यह विरोध प्रदर्शन ऑस्टेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong के उस ऐलान के कुछ दिन बाद हुआ जिसमें उन्होंने साफ किया था कि ऑस्टेलिया, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों के साथ मिलकर वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों पर व्यापार प्रतिबंध नहीं लगाएगा। विदेश मंत्री ने कहा था कि ऑस्टेलिया इसके बजाय लक्षित उपायों को अपनाएगा ताकि ऑस्टेलियाई कारोबार, फिलिस्तीनियों और इसराइल के लोगों पर किसी भी तरह का बुरा असर न पड़े। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इसराइल की नीतियां दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को खत्म कर रही हैं और बस्तियों में हो रही हिंसा को रोका जाना चाहिए।
सहायता कर्मी की मौत का मुद्दा
इस प्रदर्शन के दौरान ऑस्टेलियाई मानवीय सहायता कार्यकर्ता Zomi Frankcom की मौत का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। इस मामले में पहले भी प्रधानमंत्री Anthony Albanese और विदेश मंत्री ने इसराइल की तरफ से की गई जांच के नतीजों पर गहरी नाराजगी जताई थी। सरकार ने साफ कहा था कि उन्हें इस जांच के नतीजों पर कोई भरोसा नहीं है क्योंकि इसमें जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई भी आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों ने भी इस मामले में पूरी पारदर्शिता और न्याय की मांग की ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
वक्ताओं और संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
रैली के दौरान कई प्रमुख वक्ताओं ने सरकार की नीतियों की आलोचना की। फिलिस्तीनी लेखक और फिल्म निर्माता Shamikh Badra ने कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है। इसके अलावा Australia Palestine Advocacy Network (APAN) ने भी सरकार के लक्षित उपायों वाले रुख को खारिज किया। संगठन का कहना था कि यह तरीका गाजा में चल रहे संघर्ष और अवैध कब्जे के मामलों में देश की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करता है। एपीएएन ने जुलाई 2024 के उस अंतरराष्ट्रीय अदालत के परामर्श का भी जिक्र किया जिसमें इसराइल के कब्जे को अवैध बताया गया था। सभा को संबोधित करने वालों में सीनेटर Mehreen Faruqi भी शामिल थीं जिन्होंने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।