सीरिया सरकार का बड़ा फैसला, पूर्व राष्ट्रपति असद शासन की आतंकवाद निरोधक अदालत खत्म.

सीरिया की राजधानी दमिश्क से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। सीरिया की संसद ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल के दौरान बनाई गई आतंकवाद निरोधक अदालत को पूरी तरह से समाप्त करने का फैसला किया है। सांसदों ने इस अदालत को खत्म करने और इसके द्वारा दिए गए सभी फैसलों के कानूनी प्रभाव को पूरी तरह से रद्द करने के पक्ष में अपना वोट दिया है। सरकारी टीवी चैनल अल-इख्बारिया ने इस बात की पूरी जानकारी दी है। नई संसद के गठन के बाद से इसे देश के सबसे शुरुआती और महत्वपूर्ण विधायी फैसलों में से एक माना जा रहा है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
साल 2012 में हुई थी इस अदालत की शुरुआत
इस विवादित ‘काउंटर-टेररिज्म कोर्ट’ या आतंकवाद निरोधक अदालत की स्थापना साल 2012 में की गई थी। यह वह समय था जब देश में असद सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विद्रोह शुरू हुआ था। इस अदालत के जरिए आतंकवाद से जुड़े तमाम तरह के आरोप लगाकर भारी संख्या में सीरियाई नागरिकों के खिलाफ मुकदमे चलाए गए थे। इन मुकदमों और फैसलों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और आम जनता तथा मानवाधिकार संगठनों द्वारा इन्हें अनुचित माना जाता रहा है। संसद का यह ताजा फैसला असल में उस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देता है जिसके तहत नई सीरियाई सरकार पहले से ही इस अदालत को समाप्त मान चुकी थी और इस दिशा में लगातार कदम उठा रही थी।
पहले भी उठाए गए थे कई कड़े कदम
इससे पहले जून 2025 में राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक बड़ा आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत उस अदालत में काम कर रहे कुल 67 न्यायाधीशों को उनके पदों से हटा दिया गया था। राष्ट्रपति ने उस समय ही इस अदालत को ‘समाप्त आतंकवाद निरोधक अदालत’ करार दिया था। इसके अलावा, मार्च 2025 में जारी की गई सीरिया की संवैधानिक घोषणा में भी इस बात का साफ जिक्र किया गया था कि इस अदालत द्वारा दिए गए सभी अन्यायपूर्ण फैसलों के असर को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। इस घोषणा के नियमों में यह प्रावधान भी शामिल किया गया था कि इस अदालत के दौरान जिन लोगों की संपत्तियों को जबरन जब्त किया गया था, उन सभी संपत्तियों को उनके असली मालिकों को वापस लौटाया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठे थे गंभीर सवाल
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समिति ने साल 2024 में इस अदालत को बनाने वाले कानून पर गहरी चिंता जताई थी। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इस कानून के अंदर निष्पक्ष न्याय से जुड़ी कुछ बेहद जरूरी गारंटियों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया था। संयुक्त राष्ट्र ने लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, उनके साथ होने वाली यातना या दुर्व्यवहार और इस अदालत की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब संसद के इस नए फैसले के बाद देश में न्याय व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जिससे सीरिया के लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद बंध गई है।