हुथी हमलों के बाद सीरिया का बड़ा कदम, सऊदी अरब के साथ खड़ा हुआ दमिश्क

सऊदी अरब में हुथी मिलिशिया द्वारा किए गए हालिया हमलों के बाद अब सीरिया ने अपना रुख साफ कर दिया है। सीरियाई विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक स्थलों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विशेष रूप से अबहा और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने पर सीरिया ने गहरी चिंता जताई है।
सीरियाई सरकार का मानना है कि हुथी मिलिशिया की ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। दमिश्क ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के हमले न केवल सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डालते हैं। सीरिया ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सऊदी अरब द्वारा उठाए गए सभी वैध कदमों का पूरा समर्थन करेगा।
सैन्य मदद की चर्चा और सीरिया का रुख
यह कूटनीतिक समर्थन ऐसे समय में आया है जब सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने हाल ही में रियाद का दौरा किया और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। खबरों के मुताबिक, इन मुलाकातों के दौरान यमन के ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सीरियाई सैन्य सहायता देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसमें ड्रोन खतरों को बेअसर करने के लिए तकनीकी सहायता से लेकर सीरियाई सैनिकों की तैनाती जैसे विकल्पों पर विचार किया गया।
हालांकि, सैन्य हस्तक्षेप को लेकर सीरिया अभी भी सतर्क है। 7 अक्टूबर 2026 को सीरियाई सूचना मंत्रालय ने सरकारी टीवी चैनल 'अल-इखबारिया' के माध्यम से उन रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि सीरिया पहले ही यमन युद्ध में शामिल हो चुका है। दमिश्क ने साफ किया कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल देश के भीतर पुनर्निर्माण और सरकारी संस्थानों को मजबूत करना है। किसी भी तरह का सैन्य सहयोग केवल आधिकारिक द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से ही तय होगा।
दूसरी ओर, एक अमेरिकी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि सऊदी अरब ने हुथी हमलों से निपटने के लिए दमिश्क से सैन्य मदद मांगी है और अमेरिका को इस तैनाती पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बावजूद, सीरिया का कहना है कि उसकी क्षेत्रीय नीति शांति और स्थिरता पर केंद्रित है, न कि नए युद्ध मोर्चे खोलने पर।