इजरायली सेना की घुसपैठ और एक व्यक्ति की मौत के बाद सीरिया में देशभर में प्रदर्शन हुए
इजरायली सेना द्वारा एक विकलांग व्यक्ति की हत्या और सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ के खिलाफ सीरिया में देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।

दमिश्क: इजरायली सैन्य गतिविधियों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ 23 अक्टूबर 2026 को सीरिया में देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। दमिश्क, होम्स, दारा और कुनेत्रा जैसे दक्षिणी प्रांतों में सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जताया।
यह प्रदर्शन 22 अक्टूबर को जमला गांव में हुई एक घटना के बाद शुरू हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना ने गांव में छापेमारी की, घरों की तलाशी ली और स्नाइपर्स तैनात किए, जिसमें एक विकलांग सीरियाई व्यक्ति की मौत हो गई।
दूसरी तरफ, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने इस घटना पर अलग दावा किया है। सेना के मुताबिक, उन्होंने एक संदिग्ध को निशाना बनाया जिसने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।
दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के गिरने के बाद से इजरायल ने गोलन बफर जोन के सीरियाई हिस्से में अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है। सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने बताया कि इस दौरान देश ने करीब 500 हवाई हमलों, 1,200 घुसपैठ और लगभग 300 लोगों की हिरासत का सामना किया है।
सीरिया के संयुक्त राष्ट्र राजदूत इब्राहिम ओलाबी का कहना है कि ये कार्रवाइयां 1974 के सेना पृथक्करण समझौते और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 497 का उल्लंघन हैं। इस प्रस्ताव के तहत गोलन हाइट्स के इजरायली कब्जे को शून्य घोषित किया गया था।
हालांकि, इजरायल ने 1974 के समझौते को अब खत्म मान लिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 18 अक्टूबर 2026 को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब उन बुनियादी ढांचों को खत्म करना जरूरी है जिन्हें वे खतरा मानते हैं।
अल जजीरा और संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स में इजरायली चेकपोस्ट बनाने, आवाजाही पर पाबंदी और खेती की जमीन को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। सीरियाई अधिकारियों का आरोप है कि यह व्यवस्थित विस्थापन और बस्तियों के विस्तार का हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भी कब्जे वाले सीरियाई क्षेत्र में जमीन की जब्ती और निर्माण कार्यों का जिक्र किया गया है। फिलहाल संयुक्त राष्ट्र पृथक्करण पर्यवेक्षक बल (UNDOF) इस संवेदनशील क्षेत्र की निगरानी कर रहा है।