तइज़ के पूर्वी इलाके में हूती ठिकानों पर लड़ाकू विमानों के हमले

तइज़ (यमन): यमन के तइज़ इलाके के पूर्वी हिस्से में लड़ाकू विमानों ने हूती मिलिशिया के ठिकानों पर सघन हवाई हमले किए। यह कार्रवाई 15 अक्टूबर 2026 को की गई। हमलों से इलाके में तनाव और बढ़ गया है।
ये हमले 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' का हिस्सा हैं, जो 5 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था। इसका मकसद देश की सरकारी संस्थाओं को फिर से बहाल करना बताया गया है। यह अभियान उस समय शुरू हुआ जब जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुआ संघर्ष विराम टूट गया। इसके बाद कई मोर्चों पर लड़ाई तेज हो गई है।
तइज़ के अलावा सरकारी सेना ने जबल हान पहाड़ पर हूती हमले को नाकाम करने का दावा किया है। यह पहाड़ अल-ढबाब सड़क पर नजर रखने वाली एक अहम चौकी है। उधर अल-नशमा और बनी बक्कारी में हूती संचार टावरों को निशाना बनाया गया। अल-वज़ीआह, अल-मसरख और जबल हबाशी इलाकों में भी मिलिशिया के ठिकानों पर हमले हुए।
रिलीफवेब की रिपोर्ट के मुताबिक लगातार बढ़ते संघर्ष से तइज़ के बाहरी इलाकों में हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। पहले से ही गंभीर मानवीय हालात और बिगड़ गए हैं। आधिकारिक रिपोर्टों में कहा गया है कि सब्र अल-मवादिम जिले के रिहायशी इलाकों में हूती गोलाबारी से नागरिक हताहत हुए हैं। स्थानीय मानवाधिकार निगरानी समूहों ने बताया कि मिलिशिया की गोलीबारी में 11 घरों को नुकसान पहुंचा है। अल-शमायतीन जिले में हूती बलों द्वारा बिछाई गई सुरंगों से भी कुछ लोग घायल हुए हैं।
सेना के प्रवक्ता कर्नल अब्दुल बासित अल-बहर ने लड़ाई की तीव्रता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हूती बढ़त को रोकने के लिए यमनी सेना भीषण झड़पें लड़ रही है।
इस बीच यूरोपीय संघ और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तइज़ पर हूती घेराबंदी हटाने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि इससे प्रभावित लोगों तक खाना, दवा और ईंधन जैसी जरूरी आपूर्ति पहुंचाई जा सके।