यमन के तैज़ में हूती घेराबंदी से स्वास्थ्य सेवा ठप, 4 लाख बच्चे टीकों से वंचित
यमन के तैज़ में हूती घेराबंदी के कारण 4 लाख से अधिक बच्चे टीकों से वंचित हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

तैज़: यमन के तैज़ प्रांत में जारी संघर्ष और हूतियों की घेराबंदी ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह चरमरा दिया है। इस संकट के कारण करीब 4 लाख बच्चों को जीवन रक्षक टीकों से वंचित रहना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
जन स्वास्थ्य और जनसंख्या कार्यालय के मुताबिक, प्रांत के लगभग 3,47,000 बच्चों को खसरा और रूबेला के जरूरी टीके नहीं मिल पाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जारी युद्ध और हूतियों द्वारा की गई घेराबंदी की वजह से मेडिकल सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
संकट सिर्फ खसरा और रूबेला तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमित टीकाकरण की कमी के कारण एक साल से कम उम्र के करीब 72,500 और बच्चे बीमारियों के खतरे में हैं। इन बच्चों को उन बीमारियों से बचाने वाला कोई सुरक्षा कवच नहीं मिल पा रहा है, जिन्हें टीकों के जरिए रोका जा सकता था।
तैज़ जन स्वास्थ्य और जनसंख्या कार्यालय ने इस आपात स्थिति को देखते हुए घेराबंदी तुरंत हटाने की मांग की है। कार्यालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि सप्लाई लाइन बहाल हो सके और टीकाकरण अभियान दोबारा शुरू किया जा सके।
यमन की शूरा काउंसिल ने भी 7 नवंबर 2026 को एक बयान जारी कर जरूरी चिकित्सा और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसी बीच, जन स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय ने WHO और गावी (Gavi) के सहयोग से 7 नवंबर 2026 को एक देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया। यह अभियान उन 11 दक्षिणी प्रांतों के करीब 10 लाख बच्चों के लिए है, जो वर्तमान नाकेबंदी से प्रभावित नहीं हैं।
इस मानवीय संकट को दुनिया के सामने लाने के लिए यमनी कार्यकर्ताओं ने 7 नवंबर 2026 को वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस के बाहर प्रदर्शन किया। इसके अलावा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किए गए, ताकि इस चिकित्सा आपातकाल की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा जा सके।